Hazaribagh : झारखंड सरकार द्वारा उच्च शिक्षा में लागू क्लस्टर सिस्टम के तहत सेंट कोलंबा महाविद्यालय के उर्दू विभाग में स्नातक स्तर पर नामांकन बंद किए जाने के निर्णय का विरोध तेज होने लगा है. शनिवार को छात्रों ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कॉलेज के बाहर प्रदर्शन किया. कहा कि इससे उर्दू विषय से उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा. छात्रों ने राज्य सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए सेंट कोलंबा महाविद्यालय में उर्दू विषय में पुनः नामांकन शुरू कराने की मांग की है.
उर्दू शिक्षा की परंपरा पर पड़ेगा असर
छात्रों का कहना है कि सेंट कोलंबा महाविद्यालय हजारीबाग का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है. वर्षों से यहां उर्दू विभाग में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं नामांकन लेकर स्नातक की पढ़ाई पूरी करते रहे हैं. ऐसे में अचानक नामांकन बंद किए जाने से उर्दू शिक्षा की मजबूत परंपरा प्रभावित होगी और विद्यार्थियों को दूसरे कॉलेजों का रुख करना पड़ेगा. विद्यार्थियों ने बताया कि सेंट कोलंबा महाविद्यालय शहर के मध्य स्थित है, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की छात्राओं को पढ़ाई के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिलता है. यदि यहां उर्दू विभाग में नामांकन बंद रहता है तो छात्राओं को दूरस्थ महाविद्यालयों में जाना पड़ेगा, जिससे आवागमन, सुरक्षा और अतिरिक्त खर्च जैसी समस्याएं उत्पन्न होंगी.

उच्च शिक्षा की पूरी शृंखला होगी प्रभावित
छात्रों ने कहा कि सेंट कोलंबा महाविद्यालय से स्नातक करने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी आगे चलकर विनोबा भावे विश्वविद्यालय के पीजी उर्दू विभाग में प्रवेश लेते हैं तथा शोध (PHD) तक अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं. स्नातक स्तर पर ही नामांकन बंद हो जाने से उर्दू विषय में उच्च शिक्षा की पूरी शृंखला प्रभावित होगी और भविष्य में शोधार्थियों की संख्या भी घट सकती है. छात्रों ने झारखंड के मुख्यमंत्री एवं मानव संसाधन विकास मंत्री से अपील करते हुए कहा कि क्लस्टर सिस्टम के तहत लिए गए इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए और सेंट कोलंबा महाविद्यालय के उर्दू विभाग में स्नातक स्तर पर पुनः नामांकन प्रक्रिया शुरू की जाए. उनका कहना है कि उर्दू भाषा और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए यह कदम आवश्यक है.
मांगें नहीं मानी गईं तो होगा आंदोलन
छात्रों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो वे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि उर्दू विषय से जुड़े विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा करना है. छात्रों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी भावनाओं को समझते हुए शीघ्र उचित निर्णय लेगी.


