Saraikela: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की विशेष प्रतिवेदक सुचित्रा सिन्हा ने आज नीमडीह प्रखंड के गुंडा पंचायत अंतर्गत सीमा गांव का दौरा किया. उन्होंने पुनर्वास स्थल का निरीक्षण किया और सीमा मध्य विद्यालय परिसर में विस्थापित परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं. भ्रमण के दौरान बड़ी संख्या में विस्थापितों ने भूमि अधिग्रहण, लंबित मुआवजा, विकास पुस्तिका में नाम जोड़ने, जमीन का पट्टा, रोजगार, मूलभूत सुविधाओं, भूमि सीमांकन और अवैध कब्जे से जुड़े आवेदन एवं दस्तावेज सुचित्रा सिन्हा को सौंपे.
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चांडिल बांध से विस्थापितों को अभी तक नहीं मिला न्याय
चांडिल बांध बहुउद्देशीय परियोजना को लगभग 42 वर्ष बीत चुके हैं. इसके बावजूद आज भी विस्थापित परिवारों की मूलभूत समस्याएं लंबित हैं. कई परिवारों को आज तक उचित मुआवजा, विकास पुस्तिका और पुनर्वास नीति का लाभ नहीं मिला है. अनेक परिवारों को पुनर्वास स्थल पर भूमि ही नहीं दी गई. जिन्हें भूमि मिली भी है, उन्हें विधिवत पट्टा नहीं मिला. यह पुनर्वास प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही दर्शाता है. सुचित्रा सिन्हा ने कहा कि भ्रमण में मिले सभी आवेदन और शिकायतों की तथ्यात्मक रिपोर्ट NHRC को सौंपी जाएगी ताकि विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई हो सके. अगर जांच में पाया गया कि विभागों और अधिकारियों द्वारा गंभीर अनियमितता, लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है और नियमानुसार कार्रवाई नहीं हुई, तो स्वतंत्र जांच की अनुशंसा की जाएगी. जरूरत पड़ी तो CBI जांच की भी सिफारिश की जा सकती है. आयोग का उद्देश्य है कि विस्थापितों को संविधान और कानून के तहत मिलने वाले अधिकार समयबद्ध रूप से मिलें और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो.

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मौके पर ये रहे मौजूद
इस दौरान पुनर्वास कार्यालय संख्या-2 चांडिल के पुनर्वास पदाधिकारी सुखदेव महतो, बड़ा बाबू दारा प्रसाद मंडल, पुनर्वास स्थल प्रभारी विश्वजीत सिंह, मापक कर्मी लक्ष्मी महतो, सीमा गांव प्रभारी उत्तम पांडे, गुंडा पंचायत के मुखिया बूका सिंह और विस्थापित अधिकार मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो सहित बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार उपस्थित थे.



