प्रदीप बागची मामले में गवाह के न आने से टली सुनवाई, अब एक जून को होगी अगली पेशी

Ranchi: सेना की कब्जे वाली जमीन घोटाला मामले में रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में होने वाली सुनवाई टल गई. प्रवर्तन...

Ranchi: सेना की कब्जे वाली जमीन घोटाला मामले में रांची स्थित पीएमएलए की विशेष अदालत में होने वाली सुनवाई टल गई. प्रवर्तन निदेशालय (प्रवर्तन निदेशालय) की ओर से गवाह के अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मामले की अगली तारीख 1 जून तय की है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी द्वारा गवाही दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें जमीन जालसाजी के मास्टरमाइंड प्रदीप बागची समेत कई रसूखदार आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे हैं.

फर्जी विरासत रिकॉर्ड के दम पर सेना की जमीन पर जमाया कब्जा

ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, प्रदीप बागची इस पूरे जमीन घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड है. आरोप है कि उसने रांची और कोलकाता के संगठित लैंड माफिया रैकेट के साथ मिलकर साजिश रची. इस गिरोह ने रांची के बरियातू इलाके में स्थित भारतीय सेना के कब्जे वाली करीब 4.5 एकड़ बेशकीमती जमीन के फर्जी विरासत दस्तावेज तैयार किए. इन नकली कागजातों के सहारे प्रदीप बागची ने खुद को उस जमीन का फर्जी मालिक घोषित कर दिया.

कौड़ियों के भाव बेची जमीन, मनी लॉन्ड्रिंग से खपाए पैसे

दस्तावेजों में हेरफेर करने के बाद सेना की इस जमीन को एक निजी कंपनी को बाजार मूल्य से बेहद कम कीमत पर बेच दिया गया. इस अवैध सौदे से मिले करोड़ों रुपयों के लेन-देन में भारी हेराफेरी की गई और ब्लैक मनी को सफेद करने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा लिया गया. ईडी की वित्तीय जांच में पैसों के इस अवैध ट्रांजैक्शन की कड़ियों को खंगाला गया है.

पूर्व उपायुक्त छवि रंजन समेत कई दिग्गज जा चुके हैं जेल

इस घोटाले की जड़ें झारखंड पुलिस द्वारा धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत दर्ज शुरुआती प्राथमिकी से जुड़ी हैं. मामले में पूर्व उपायुक्त छवि रंजन भी जेल जा चुके हैं. फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए जब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई, तो प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया था.

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