News Desk: भारत ने अपनी परमाणु ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) में 6 अप्रैल 2026 को पहली क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है. यह उपलब्धि एक स्थायी न्यूक्लियर चेन रिएक्शन की शुरुआत को दर्शाती है. 500 मेगावाट क्षमता वाला यह रिएक्टर भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा कलपक्कम न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में निर्मित किया गया है.
दूसरे चरण में आधिकारिक प्रवेश, वैश्विक स्तर पर बड़ी उपलब्धि
इस उपलब्धि के साथ भारत ने अपने तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में आधिकारिक रूप से प्रवेश कर लिया है, जिसकी परिकल्पना परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ होमी जहांगीर भाभा ने की थी. इस सफलता के बाद भारत दुनिया का दूसरा देश बनने की दिशा में अग्रसर है, जो रूस के बाद व्यावसायिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का संचालन करेगा.
यह उपलब्धि दशकों से परमाणु ऊर्जा विभाग के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है और भारत के स्वच्छ एवं कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है. साथ ही यह देश को 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के करीब ले जाता है.
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तीन चरणों वाला परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम
भारत के पास यूरेनियम के सीमित भंडार हैं, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक मौजूद है. इसी को ध्यान में रखते हुए परमाणु ऊर्जा विभाग ने एक क्लोज्ड न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल पर आधारित तीन चरणों वाला कार्यक्रम तैयार किया है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है.
पहला चरण: PHWR रिएक्टर
पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर में किया जाता है. इन रिएक्टरों से उत्पन्न प्रयुक्त ईंधन से प्लूटोनियम प्राप्त होता है, जो दूसरे चरण के लिए प्रमुख ईंधन बनता है.
दूसरा चरण: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर
दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में प्लूटोनियम का उपयोग किया जाता है, जो जितना ईंधन उपयोग करते हैं उससे अधिक उत्पन्न करते हैं. कलपक्कम का PFBR इसी चरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह रिएक्टर थोरियम से यूरेनियम 233 तैयार करने की दिशा में भी मार्ग प्रशस्त करता है.
तीसरा चरण: थोरियम आधारित रिएक्टर
तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टरों का उपयोग किया जाएगा, जिसमें यूरेनियम 233 को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. यह चरण भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा का आधार माना जाता है.
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PFBR की तकनीकी विशेषताएं
PFBR दशकों के स्वदेशी अनुसंधान और इंजीनियरिंग का परिणाम है, जिसकी तकनीक इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च द्वारा विकसित की गई है. यह रिएक्टर यूरेनियम प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग करता है, जो PHWR रिएक्टरों के प्रयुक्त ईंधन के पुनर्प्रसंस्करण से प्राप्त होता है.
इस रिएक्टर का कोर यूरेनियम 238 की परत से घिरा होता है, जिसमें फास्ट न्यूट्रॉन के माध्यम से प्लूटोनियम 239 का निर्माण होता है, जिससे यह रिएक्टर जितना ईंधन खर्च करता है उससे अधिक उत्पन्न करने में सक्षम होता है.
साथ ही यह रिएक्टर भविष्य में थोरियम 232 का उपयोग कर उसे यूरेनियम 233 में परिवर्तित करने की क्षमता भी रखता है, जो तीसरे चरण के लिए महत्वपूर्ण ईंधन होगा. इसमें क्लोज्ड फ्यूल साइकिल अपनाई गई है, जिससे प्रयुक्त ईंधन को पुनः प्रोसेस कर दोबारा उपयोग किया जा सकता है.
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भारत में परमाणु ऊर्जा की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 गीगावाट है. वर्ष 2024-25 के दौरान देश के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों ने 56,681 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया, जो कुल बिजली उत्पादन का लगभग 3.1 प्रतिशत है. हालांकि अब यह क्षेत्र तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है.
भविष्य की योजना और विस्तार
भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को आने वाले वर्षों में लगभग तीन गुना बढ़ाने की योजना है. स्वदेशी 700 मेगावाट रिएक्टरों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित 1000 मेगावाट रिएक्टरों के माध्यम से इसे 2031-32 तक 22.38 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
भारत ने शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग के लिए 18 देशों के साथ अंतर-सरकारी समझौते भी किए हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत के परमाणु कार्यक्रम में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है.
2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य
सरकार ने यूनियन बजट 2025-26 में न्यूक्लियर एनर्जी मिशन की घोषणा की है, जिसके तहत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. यह मिशन भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएगा. यह पूरी उपलब्धि इस बात का संकेत है कि परमाणु ऊर्जा अब केवल एक वैकल्पिक स्रोत नहीं रह गई है, बल्कि भारत के ऊर्जा भविष्य की एक मजबूत आधारशिला बनती जा रही है.
कुल मिलाकर, कलपक्कम में PFBR की सफलता केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक क्षमता और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम है, जो आने वाले दशकों में देश की ऊर्जा रणनीति को नई मजबूती प्रदान करेगा.
