Dhanbad : कोयलांचल की पहचान अब सिर्फ काले हीरे से ही नहीं, बल्कि सघन वनों से भी होगी. भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए महुदा क्षेत्र के बेलाखोंडा स्थित अपनी 9.81 एकड़ जमीन धनबाद वन प्रमंडल को सौंपने की कवायद शुरू कर दी है. कभी कोयला खनन के लिए उपयोग होने वाली यह भूमि अब बहुत जल्द एक घने जंगल के रूप में नजर आएगी.

ये भी पढ़ें : झारखंड पुलिस के ‘स्निफर डॉग्स’ को मिलेगा हाई-प्रोटीन डाइट, सीआईडी खरीदेगा रॉयल कैनिन और डिबैक सेंस जैसा प्रीमियम फूड
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
स्थान: बेलाखोंडा, महुदा क्षेत्र (बीसीसीएल)
कुल क्षेत्रफल: 9.81 एकड़
उद्देश्य: जैव विविधता का संरक्षण और स्थानीय जलवायु में सुधार
प्रदूषण के खिलाफ बड़ी जंग
धनबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इस परियोजना को काफी अहम माना जा रहा है. बीसीसीएल की यह जमीन लंबे समय से बंद पड़ी थी. अब वन विभाग इस पर प्राथमिकता के आधार पर वृक्षारोपण करेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल क्षेत्र का इकोलॉजिकल बैलेंस (पारिस्थितिक संतुलन) सुधरेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों को स्वच्छ हवा भी मिल सकेगी. उनका लक्ष्य इस बंजर नजर आने वाली भूमि को एक मिनी फॉरेस्ट के रूप में विकसित करना है. इससे स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और तापमान में गिरावट आएगी.

ये भी पढ़ें : डीसी ने सभी डीडीओ के साथ की बैठक, कहा- एक पैसे की गलत निकासी नहीं होगी बर्दाश्त
बनेगा नया ‘ग्रीन बेल्ट’
वन विभाग इस जमीन पर स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने की योजना बना रहा है, जो कम समय में घने हो जाते हैं. यह प्रोजेक्ट बीसीसीएल और वन विभाग के बीच हुए विशेष आदान-प्रदान का हिस्सा है. आने वाले कुछ वर्षों में, बेलाखोंडा का यह क्षेत्र धनबाद के लिए एक नए ‘फेफड़े’ (Oxygen Hub) के रूप में कार्य करेगा.
पर्यावरण प्रेमियों में हर्ष
बीसीसीएल के इस निर्णय का स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने स्वागत किया है. उनका कहना है कि खनन क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीनों का इसी तरह सदुपयोग होना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर वातावरण मिल सके.
