हंगामे की सुलगती आग के बीच शुरू होगा झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र, युवाओं के मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना

Ranchi : झारखंड की सियासत का पारा एक बार फिर उफान मार रहा है. झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का आगामी छह...

झारखंड विधानसभा

Ranchi : झारखंड की सियासत का पारा एक बार फिर उफान मार रहा है. झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का आगामी छह अगस्त से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा. महज पांच कार्य दिवसों वाले इस संक्षिप्त लेकिन राजनीतिक रूप से हंगामेदार होने के आसार है. सत्ता के गलियारों में सुगबुगाहट तेज है कि यह सत्र केवल विधायी कार्यों का गवाह नहीं बनेगा, बल्कि जेपीएससी JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार आर-पार देखने को मिलेगा. एक तरफ जहां सड़क से लेकर सदन तक सीबीआई CBI जांच की मांग को लेकर हमलावर विपक्ष सरकार को चौतरफा घेरने की पुख्ता रणनीति बना चुका है. वहीं, दूसरी ओर सत्ता पक्ष भी अपनी जीरो टॉलरेंस नीति और प्रशासनिक कार्रवाई कर हर वार का माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह कमर कस चुका है.

सत्ता पक्ष की ओर से बचाव का चक्रव्यूह

सत्र के आगाज से पहले दोनों खेमों ने अपने तरकश के तीर दुरुस्त कर लिए हैं. पांच अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में एटीआई ATI में होने वाली सत्ता पक्ष की अहम बैठक में मंत्रियों और विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि वे विपक्ष के हर तीखे सवाल का तथ्यात्मक और ठोस जवाब दें. सरकार का मुख्य फोकस यह साबित करना होगा कि जेपीएससी JPSC प्रकरण में उसने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीआईडी CID जांच के आदेश दिए हैं. तत्कालीन प्रभारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और टीडीपीएल TDPL एजेंसी से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी की है, तथा तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते का इस्तीफा लिया है. इसके साथ ही, कांग्रेस के कंधों पर सवार होकर नीट NEET पेपर लीक जैसे राष्ट्रीय मुद्दों के जरिए केंद्र सरकार और भाजपा को भी कठघरे में खड़ा करने की रणनीति बनाई गई है.

विपक्ष का आक्रामक तेवर

वहीं, विपक्ष इस सत्र को सरकार के खिलाफ आर-पार की अंतिम लड़ाई बनाने के मूड में है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में एनडीए NDA खेमा जेपीएससी JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी को मुख्य हथियार बनाकर सीबीआई CBI जांच की मांग को सड़क से सदन तक गूंजाएगा. आजसू पार्टी भी इस मुहिम में पूरी ताकत से साथ खड़ी नजर आएगी. सत्र के पहले दिन छह अगस्त को होने वाली एनडीए NDA विधायक दल की बैठक में सदन के भीतर सरकार को घेरने की अंतिम रणनीति को धार दी जाएगी. इसके अलावा, राज्य की कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी विपक्ष के तरकश का एक प्रमुख तीर रहेगा.

विधायकों के सवालों और आश्वासनों से बेपरवाह विभाग

एक तरफ जहां राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेरने की जुगत में हैं. वहीं दूसरी तरफ विधानसभा की कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ा हो गया है. आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि झारखंड सरकार के विभिन्न विभाग विधानसभा के प्रति कितने संवेदनहीन और लापरवाह रवैये से काम ले रहे हैं. जनता के बुनियादी सवालों और सदन की गरिमा को किस तरह ठेंगा दिखाया जा रहा है. इसकी बानगी पिछले डेढ़ वर्षों के आंकड़ों से साफ झलकती है. मौजूदा विधानसभा के पिछले डेढ़ वर्षों के कार्यकाल के दौरान सरकार द्वारा सदन में कुल 1390 आश्वासन दिए गए, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इन पर संबंधित विभागों की ओर से आज तक कोई जवाब या अनुपालन रिपोर्ट नहीं आई.

73 फीसदी सवालों पर विभागों की चुप्पी

विधायकों द्वारा जनहित से जुड़े मुद्दों पर पूछे जाने वाले सवालों का हाल भी कुछ ऐसा ही बदहाल है. पिछले बजट सत्र के दौरान शून्यकाल के माध्यम से पक्ष और विपक्ष के विधायकों की ओर से कुल 440 सूचनाएं सदन के पटल पर रखी गई थीं. इनमें से बमुश्किल 119 सूचनाओं के ही जवाब विभागों द्वारा दिए जा सके, जबकि शेष 321 सूचनाएं यानी करीब 73 फीसदी सवालों पर विभागों ने चुप्पी साध ली और कोई भी कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा. इसी तरह, शून्यकाल समिति के पास पहुंचे मामलों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों, आश्वासन समितियों की फाइलों और ऑनलाइन प्राप्त हुए सैकड़ों सवालों में से अधिकांश हिस्सा आज भी विभागों की फाइलों में धूल फांक रहा है. ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त 290 में से 107 यानी 63.1 प्रतिशत सवालों के जवाब अभी तक गायब हैं. निवेदन समिति के समक्ष आए 183 मामलों में से 161 का अब तक कोई अतापता नहीं है.

पांच दिनों का संक्षिप्त सफर और व्यस्त एजेंडा

• 6 अगस्त : सत्र के पहले दिन आवश्यकता पड़ने पर नवनिर्वाचित सदस्यों का शपथ ग्रहण होगा. राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेशों की प्रमाणीकृत प्रतियां सदन पटल पर रखी जाएंगी और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए शोक प्रस्ताव लाया जाएगा.
7 अगस्त : प्रश्नकाल के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम अनुपूरक व्यय विवरणी सदन में प्रस्तुत की जाएगी.
8 एवं 9 अगस्त : शनिवार और रविवार होने के कारण सदन की कार्यवाही का अवकाश रहेगा.
10 अगस्त : प्रश्नकाल के बाद प्रथम अनुपूरक व्यय विवरणी पर सामान्य चर्चा होगी, जिसपर मतदान के जरिए संबंधित विनियोग विधेयक को पारित कराया जाएगा.
11 अगस्त : प्रश्नकाल के उपरांत राजकीय विधेयकों और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा.
• 12 अगस्त : प्रश्नकाल के साथ राजकीय विधेयकों का निष्पादन किया जाएगा तथा गैर-सरकारी सदस्यों के संकल्पों पर चर्चा होगी.

 

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