झारखंड कैबिनेट की अहम बैठक, हेमंत सोरेन लेंगे कई बड़े फैसले, इन 3 मुख्य प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार, 21 जुलाई को आयोजित की जाएगी....

Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार, 21 जुलाई को आयोजित की जाएगी. मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह बैठक दोपहर 3:00 बजे से रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में शुरू होगी. इस कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास, शिक्षा और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा होगी. माना जा रहा है कि सरकार इस दौरान अन्य प्रस्ताव के साथ साथ तीन प्रमुख प्रस्तावों पर अपनी हरी झंडी दे सकती है.

जल जीवन मिशन 2.0 (JJM 2.0) को मिल सकती है घटनोत्तर स्वीकृति:

बैठक में ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के प्रस्ताव पर घटनोत्तर स्वीकृति मिलने की प्रबल संभावना है. बीते दो जून को राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के साथ नई दिल्ली में जेजेएम 2.0 को लेकर एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया था. जल जीवन मिशन 2.0 केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त साझेदारी के तहत संचालित होने वाली एक महत्वाकांक्षी योजना है. इसका मुख्य उद्देश्य टिकाऊ ग्रामीण जल वितरण व्यवस्था में सुधार करना और समुदाय-संचालित एवं जवाबदेह जल सुशासन को बढ़ावा देना है. इस फैसले से ग्रामीण इलाकों में घर-घर तक नल से जल पहुंचाने की मुहिम को और मजबूती मिलेगी.

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के बायलॉज (नियमावली) में संशोधन:

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी कैबिनेट की टेबल पर रखे जाएंगे. विभाग की कई पुरानी नियमावलियों (बायलॉज) में संशोधन के प्रस्ताव शामिल हैं. इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और छात्रों के अनुकूल बनाना है. संशोधन स्वीकृत होने के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधार देखने को मिल सकते हैं.

गंभीर बीमारी से पीड़ित छात्रों को अटेंडेंस में बड़ी राहत: 75% अनिवार्य उपस्थिति की शर्त होगी खत्म:

कैबिनेट की इस बैठक में राज्य के विद्यार्थियों के हित में एक बेहद संवेदनशील और बड़ा निर्णय लिया जा सकता है. थैलेसीमिया, कैंसर या अन्य गंभीर और असाध्य बीमारियों से जूझ रहे छात्रों के लिए 75 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति की बाध्यता को समाप्त करने के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है. नियमित रूप से इलाज, ब्लड ट्रांसफ्यूजन या अस्पताल के चक्कर काटने के कारण इन बीमारियों से पीड़ित बच्चे नियमित कक्षाएं अटेंड नहीं कर पाते थे. इस शर्त के हटने से बीमार छात्रों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी और उनका शैक्षणिक वर्ष खराब होने से बच सकेगा.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *