झारखंड सरकार का कुपोषण के खिलाफ जंग तेज: आंगनबाड़ियों और किशोरियों के पोषण का रास्ता साफ, पोषाहार का निर्बाध वितरण हुआ सुनिश्चित

Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य के लाखों बच्चों और किशोरियों के पोषण को लेकर कवायद शुरू कर दी है. केंद्र प्रायोजित मिशन...

Anganwadi
एआई सांकेतिक इमेज

Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य के लाखों बच्चों और किशोरियों के पोषण को लेकर कवायद शुरू कर दी है. केंद्र प्रायोजित मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत पूरक पोषाहार कार्यक्रम और किशोरी बालिकाओं के लिए योजना के सुचारू संचालन को लेकर प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर दिया गया है. राज्य सरकार ने लाभार्थियों को टेक होम राशन के रूप में मिलने वाले पौष्टिक आहार के निर्बाध वितरण के लिए आपूर्तिकर्ताओं के मनोनयन पर मुहर लगा दी है.

क्या है पूरी योजना और जरूरत?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, आंगनबाड़ियों के माध्यम से 6 माह से 36 माह के बच्चों, 6 से 72 माह के अतिकुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धातृ माताओं और 14-18 वर्ष की किशोरियों को मशीनीकृत संसाधित पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है. इसमें शिशु आहार, पौष्टिक मीठा और नमकीन दलिया शामिल है, जो वर्ष में 300 दिन लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए.

प्रक्रियात्मक विलंब के कारण बनी बैकलाग की स्थिति

पूर्व में आपूर्तिकर्ताओं के साथ हुआ अनुबंध जनवरी 2025 में समाप्त होना था, जिसे विभिन्न संकल्पों के माध्यम से कुल 12 महीने (जनवरी 2026 तक) के लिए विस्तारित किया गया था. हालांकि, प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं, गुणवत्ता जांच और विभिन्न राज्यादेशों के पालन के कारण आपूर्ति में कुछ बैकलाग की स्थिति उत्पन्न हो गई थी. विभागीय स्तर पर नई निविदा प्रक्रिया पूरी होने में 5 से 6 महीने का समय लगने की संभावना को देखते हुए, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि बच्चों और महिलाओं को मिलने वाले पोषण में कोई रुकावट न आए.

सरकार के निर्णय और शर्तें

• मनोनयन की स्वीकृति: मेसर्स इंटरलिंक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड , मेसर्स आदित्य फ्लॉर मिल और मेसर्स कोटा दाल मिल को आगामी छह (06) महीने के लिए अथवा नई निविदा से कार्यादेश निर्गमण होने तक (जो पहले हो) के लिए अधिकृत किया गया है.

• फरवरी और मार्च 2026 का विनियमन: इन आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से फरवरी एवं मार्च 2026 में की गई आपूर्ति और वितरण कार्य को भी विधिवत विनियमित करने का प्रावधान किया गया है.

• पारदर्शी व्यवस्था: प्रशासी विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस 6 महीने की विस्तारित अवधि के भीतर खुली निविदा के माध्यम से नए आपूर्तिकर्ताओं का चयन कर लिया जाए.

Also Read: झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर ऊर्जा विकास निगम के 5 अधिकारियों को राहत, 2015 के प्रभाव से मिली प्रोन्नति

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *