Ranchi: कंक्रीट और लोहे से बने फ्लाईओवर अब सिर्फ आवागमन का जरिया नहीं रहेंगे, बल्कि झारखंड की संस्कृति और परंपरा की पहचान भी बनेंगे. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने खजूरी–विंधमगंज मार्ग पर बने फ्लाईओवर को पारंपरिक “सोहराय पेंटिंग” से सजाकर उसे सांस्कृतिक रंग दे दिया है.
दीवारों पर दिखी झारखंड की सांस्कृतिक झलक
फ्लाईओवर की दीवारों पर उकेरी गई रंग-बिरंगी कलाकृतियों में झारखंड की लोक परंपरा, प्रकृति, जनजीवन और आदिवासी संस्कृति की खूबसूरत झलक दिखाई दे रही है. कहीं पारंपरिक आकृतियां नजर आ रही हैं, तो कहीं राज्य की सांस्कृतिक विरासत और महापुरुषों को चित्रों के माध्यम से जीवंत किया गया है. गुजरने वाले यात्रियों के लिए यह फ्लाईओवर अब सिर्फ सड़क संरचना नहीं, बल्कि चलते-फिरते कला संग्रहालय जैसा अनुभव दे रहा है.

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सोहराय कला को मिली नई पहचान
सोहराय पेंटिंग झारखंड की प्राचीन लोक कलाओं में शामिल है, जिसे खास तौर पर ग्रामीण और आदिवासी समाज से जुड़ी महिलाएं पारंपरिक शैली में बनाती रही हैं. अब इसी कला को राष्ट्रीय राजमार्ग के फ्लाईओवर पर स्थान देकर उसे नई पहचान देने की कोशिश की गई है.
विकास और विरासत का संतुलन
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की यह पहल विकास और विरासत के संतुलन का उदाहरण बन रही है. एक ओर आधुनिक सड़क नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कला और कलाकारों को भी मंच दिया जा रहा है. इससे क्षेत्रीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोग भी झारखंड की सांस्कृतिक पहचान से रूबरू हो सकेंगे.
यात्रियों के आकर्षण का केंद्र बना फ्लाईओवर
खजूरी-विंधमगंज मार्ग पर बना यह फ्लाईओवर अब यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है. सड़क पर सफर करने वाले लोग यहां रुककर तस्वीरें ले रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई है.
