Giridih: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है. ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी टकराव की स्थिति ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत सहित कई देशों में LPG गैस के दाम बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है.
लकड़ी की बढ़ी मांग
गिरिडीह जिले के डोराण्डा बाजार में इन दिनों इसका स्पष्ट प्रभाव देखने को मिल रहा है. बाजार में सुबह से लेकर देर शाम तक लकड़ी खरीदने वालों की भीड़ उमड़ रही है. महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग सभी बड़ी संख्या में लकड़ी की दुकानों पर पहुंच रहे हैं. कई जगहों पर लोगों को अपनी बारी के लिए इंतजार भी करना पड़ रहा है.
गैस हुआ महंगा
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि पहले जहां महीने में एक या दो बार गैस सिलेंडर भरवाकर काम चल जाता था, अब बढ़ती कीमतों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है. ऐसे में मजबूरन पारंपरिक चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों से आए कई लोगों ने बताया कि वे पहले भी आंशिक रूप से लकड़ी का उपयोग करते थे, लेकिन अब पूरी तरह उसी पर निर्भर होते जा रहे हैं.
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लकड़ी की बिक्री में उछाल
दुकानदारों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में लकड़ी की बिक्री में काफी तेजी आई है. पहले जहां सीमित मात्रा में बिक्री होती थी, अब रोजाना कई क्विंटल लकड़ी बिक रही है. मांग बढ़ने के कारण लकड़ी के दामों में भी 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा रही है. कुछ दुकानदारों ने बताया कि यदि यही स्थिति बनी रही तो सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है.
सरकार से मांग
स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि LPG गैस की कीमतों को नियंत्रित किया जाए या फिर सब्सिडी बढ़ाकर आम लोगों को राहत दी जाए. साथ ही, उज्ज्वला योजना जैसे कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने की जरूरत बताई जा रही है ताकि गरीब परिवारों को सस्ती दरों पर गैस उपलब्ध हो सके.
फिर लौट रहा पारंपरिक ईंधन
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव का असर अब गिरिडीह के स्थानीय बाजारों में साफ नजर आ रहा है, जहां महंगी गैस के कारण लोग एक बार फिर पारंपरिक ईंधन की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं.
