Ranchi: केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में तैनात डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. सीबीआई ने इंजीनियर के साथ-साथ कोलकाता की एक निजी कंपनी मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के दो प्रतिनिधियों को भी गिरफ्तार किया है. इस मामले में सीबीआई ने झारखंड सहित बिहार और पश्चिम बंगाल के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है.
झारखंड से जुड़ा है पूरा मामला
रिश्वतखोरी के आरोप में पकड़े गए अधिकारी दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं. आरोपी अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने चक्रधरपुर डिविजन में चल रहे सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन के कार्यों से संबंधित ‘कॉन्ट्रैक्ट वेरिएशन फाइल’ और ‘प्राइस वेरिएशन क्लॉज को मंजूरी देने तथा अनुचित फायदा पहुंचाने के बदले कोलकाता की निजी कंपनी से भारी रिश्वत की मांग की थी.
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झारखंड समेत 3 राज्यों में सीबीआई की रेड
गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की टीमों ने झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार में आरोपी अधिकारी और अन्य आरोपियों के आवासीय और कार्यालय परिसरों में छापेमारी की. इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद कर जब्त किए गए हैं.
हावड़ा स्टेशन पर सीबीआई ने बिछाया जाल
सीबीआई को शिकायत मिलने के बाद 24 जुलाई को मामला दर्ज किया गया था.जांच के दौरान पता चला कि आरोपी अधिकारी पहले भी मई 2026 में फाइल पास करने के एवज में पांच लाख रुपये की अनुचित रकम ले चुका था. बाकी बची रिश्वत की रकम हासिल करने के लिए जब आरोपी रेलवे इंजीनियर हावड़ा स्टेशन पहुंचा, तब सीबीआई ने जाल बिछाकर उसे निजी कंपनी के प्रतिनिधियों से चार लाख रुपये की नकद रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा। सीबीआई ने मौके से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली है.
पश्चिम बंगाल में सालों बाद CBI की बड़ी ट्रैप
सीबीआई के अनुसार, पश्चिम बंगाल के क्षेत्र में कई वर्षों बाद यह किसी रिश्वतखोरी के मामले में रंगे हाथों पकड़ने की पहली बड़ी सीबीआई कार्रवाई है। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी यह सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.
