Ranchi: हाईकोर्ट ने मनरेगा योजना के तहत पिछले 15 वर्षों से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उन्हें आउटसोर्सिंग पर न भेजा जाए, आवश्यकता पड़ने पर स्वीकृत पद सृजित कर उन्हें मनरेगा योजना के वैधानिक प्रावधानों के तहत नियुक्त किया जाए, न्यायाधीश दीपक रौशन की अदालत ने पलामू और पश्चिमी सिंहभूम के कंप्यूटर ऑपरेटरों की दो याचिकाओं पर संयुक्त फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता 10 से 15 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं उनके खिलाफ कार्यकुशलता या योग्यता को लेकर कोई शिकायत नहीं है केवल यह आधार कि वे स्वीकृत पदों पर नियुक्त नहीं थे, उन्हें आउटसोर्सिंग में भेजने का कारण नहीं बन सकता, अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक लगातार सेवा लेने के बाद कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग में भेजना अनुचित श्रम व्यवहार होगा, यदि स्वीकृत पदों की कमी है तो सरकार आवश्यक पद सृजित करे और कर्मचारियों को मनरेगा के 2007 विनियमों के तहत वैधानिक संरक्षण प्रदान करे, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को स्वीकृत पदों पर समायोजित किया जाए, उन्हें आउटसोर्सिंग में न भेजा जाए तथा अंतरिम आदेश के बाद से बकाया वेतन सहित सभी सेवा लाभ भी दिए जाएं, इसके साथ ही दोनों रिट याचिकाओं का निस्तारण करते हुए अदालत ने उन्हें स्वीकार कर लिया.
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15 साल से कार्यरत मनरेगा कंप्यूटर ऑपरेटरों को बड़ी राहत, HC ने आउटसोर्सिंग पर रोक लगाकर नियमित स्वीकृत पदों पर समायोजन का दिया आदेश
Ranchi: हाईकोर्ट ने मनरेगा योजना के तहत पिछले 15 वर्षों से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को...
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