मई में ‘मानसून’ की दस्तक: 9 वेदर सिस्टम ने हिलाया मौसम का मिजाज, हजारीबाग में ओलावृष्टि और बारिश से पारा गिरा; सुपर अल-नीनो की आहट ने बढ़ाई चिंता

Hazaribagh: आमतौर पर मई के महीने में झारखंड की धरती सूरज की तपिश से तपती है, लेकिन इस बार कुदरत का करिश्मा...

Hazaribagh: आमतौर पर मई के महीने में झारखंड की धरती सूरज की तपिश से तपती है, लेकिन इस बार कुदरत का करिश्मा कुछ अलग ही दिख रहा है. देश भर में सक्रिय 9 वेदर सिस्टम के कारण झारखंड सहित पूरे राज्य में मौसम पूरी तरह बदल गया है. भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मई के शुरुआती दिनों में ही झारखंड के कई जिलों में मानसून जैसी स्थिति बनी हुई है.

झारखंड का विश्लेषण: बिहार-यूपी की राह पर वर्षा का रिकॉर्ड

जहां पड़ोसी राज्य बिहार में 180% और उत्तर प्रदेश में 149% ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, वहीं झारखंड में भी पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से बारिश का ग्राफ सामान्य से काफी ऊपर चला गया है. राज्य के मध्य और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में बादलों की गर्जना और तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को चुनौती दी है.

हजारीबाग डायरी: मिलीमीटर में बारिश का खेल

हजारीबाग जिले में पिछले 48 घंटों के दौरान मौसम का मिजाज सबसे ज्यादा बिगड़ा हुआ देखा गया. स्थानीय स्तर पर सक्रिय ट्रफ लाइन और नमी के कारण जिले के विभिन्न प्रखंडों में 15 मिमी से 30 मिमी तक की छिटपुट बारिश दर्ज की गई है, जिससे अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री की गिरावट आई है. बरही और कटकमसांडी जैसे इलाकों में हल्की ओलावृष्टि ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन आम नागरिकों को भीषण लू से बड़ी राहत मिली है.

ALSO READ: कम बारिश भी नहीं छीन पाएगी किसानों की मुस्कान, अल नीनो’ से निपटने को झारखंड तैयार, 10 साल का मास्टर प्लान जारी

सावधान! ‘सुपर अल-नीनो’ का साया

विश्व मौसम संगठन की चेतावनी के अनुसार, मई से जुलाई के बीच सुपर अल-नीनो सक्रिय हो सकता है. इसका मतलब यह है कि अभी जो बारिश हमें राहत दे रही है, वह आगे चलकर मानसून के पैटर्न को और भी ज्यादा अनिश्चित बना सकती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण एक ही समय में ‘लू’ और ‘भारी बारिश’ जैसी विपरीत घटनाएं अब आम होती जा रही हैं.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *