Ranchi: झारखंड में इस मानसून सीजन 1 जून से 7 अगस्त तक बादलों की लुकाछिपी और बारिश की बेरुखी ने चिंता बढ़ा दी है. राज्य में मानसून के इस शुरुआती दौर में बादलों ने वह मेहरबानी नहीं दिखाई जिसकी उम्मीद किसानों और आम लोगों को थी. मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है. इस समयावधि के दौरान पूरे झारखंड राज्य का औसत वर्षापात सामान्य से 22% कम दर्ज किया गया है, जो कि मौसम विभाग के मानकों के अनुसार ‘कमी’ की श्रेणी में आता है. राज्य में इस दौरान 581.9 मिलीमीटर सामान्य बारिश के मुकाबले मात्र 452 मिलीमीटर वास्तविक वर्षा ही हो पाई है.
पश्चिमी सिंहभूम रहा सबसे आगे, चतरा और गढ़वा में सबसे बुरा हाल
झारखंड के 24 जिलों में से केवल पश्चिमी सिंहभूम ही एक ऐसा जिला रहा जहां इस साल मानसून की चाल सकारात्मक रही है. पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य 575.7 मिलीमीटर के मुकाबले 661.6 मिलीमीटर वास्तविक वर्षा हुई, जो कि 15% अधिक है. इसके विपरीत, चतरा और गढ़वा जिलों में मानसून की सबसे ज्यादा बेरुखी देखने को मिली है. इन दोनों ही जिलों में सामान्य से 56% की भारी कमी दर्ज की गई है.

यह भी पढ़ें: विधानसभा पहुंचे जयराम महतो तो T-shirt ने खींचा ध्यान, JPSC-JSSC मुद्दे पर सरकार को दिया संदेश

सामान्य श्रेणी वाले जिले
• साहिबगंज: यहां सामान्य (659.1 मिमी) के मुकाबले 610.9 मिमी बारिश हुई, सात फीसदी की कमी दर्ज की गई.
• रांची: राजधानी रांची में सामान्य वर्षा 600.9 मिमी के मुकाबले 555.5 मिमी दर्ज की गई, जो कि आठ फीसदी कम है.
• सिमडेगा: यहां सबसे अधिक 690.9 मिलीमीटर वास्तविक वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से नौ फीसदी कम है.
• पूर्वी सिंहभूम: यहां सामान्य से 12% कम दर्ज हुई.
• खूंटी: खूंटी में 15% फीसदी कम बारिश हुई है.
• धनबाद और दुमका: दोनों ही जिलों में 16% की कमी दर्ज की गई.
• सरायकेला-खरसावां: यहां स्थिति सबसे अच्छी सामान्य श्रेणियों में रही, जहां मात्र तीन फीसदी कमी दर्ज की गई.
इन जिलों में है चिंताजनक स्थिति
मध्यम से भारी कमी वाले जिले: बोकारो में 34%), देवघर में 48%, गिरिडीह में 42%, गोड्डा में 22%, गुमला में 29%, हजारीबाग में 35%, जामताड़ा में 24%, कोडरमा में 43%, लातेहार में 29%, लोहरदगा में 28%, पलामू में 41%, और रामगढ़ में 28% फीसदी बारिश कम हुई है. इन सभी जिलों में समय पर पर्याप्त बारिश न होने के कारण धान की रोपनी और खरीफ फसलों के खेतों में नमी की कमी देखी जा रही है.

