RERA प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन बढ़ाने की तैयारी, घर खरीदारों पर पड़ेगा असर

Newswave Desk: अगर आपने किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में घर बुक किया है और पजेशन का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर...

RERA projects
Move to extend deadlines for RERA projects; homebuyers to be affected. (AI IMAGE)

Newswave Desk: अगर आपने किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में घर बुक किया है और पजेशन का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है. केंद्र सरकार ने देशभर के RERA में रजिस्टर्ड कुछ हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए 4 महीने तक का अतिरिक्त समय देने की सिफारिश की है. इससे बिल्डरों को राहत मिलेगी, लेकिन कई घर खरीदारों को अपने फ्लैट या मकान का पजेशन मिलने में देरी हो सकती है. सरकार के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों की वजह से कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं. निर्माण सामग्री की सप्लाई प्रभावित होने और लागत बढ़ने के कारण यह फैसला लिया गया है.

किन वजहों से आ रही है देरी?

  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है.
  • सीमेंट, स्टील, एल्युमीनियम समेत कई निर्माण सामग्रियों की उपलब्धता प्रभावित हुई है.
  • ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है.
  • निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की सप्लाई भी प्रभावित हुई है.

किन प्रोजेक्ट्स को मिलेगा फायदा?

  • यह राहत उन RERA पंजीकृत हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को मिल सकती है,
  • जिनकी मूल समयसीमा 28 फरवरी 2026 या उसके बाद खत्म हो रही है.
  • जिनकी पहले बढ़ाई गई समयसीमा भी 28 फरवरी 2026 या उसके बाद समाप्त हो रही है.
  • ऐसे प्रोजेक्ट्स को एक बार के लिए 4 महीने तक का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है.

क्या बिल्डरों को आवेदन करना होगा?

केंद्र सरकार ने राज्य RERA प्राधिकरणों को ऐसे पात्र प्रोजेक्ट्स के लिए एक समान आदेश जारी करने की सलाह दी है. ऐसे में बिल्डरों को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी और पूरी प्रक्रिया आसान हो जाएगी.

घर खरीदारों पर क्या होगा असर?

इस फैसले के बाद कई खरीदारों को अपने घर का पजेशन मिलने में कुछ महीने की देरी हो सकती है. इसका असर गृह प्रवेश, किराए के मकान से शिफ्टिंग और अन्य वित्तीय योजनाओं पर भी पड़ सकता है. जिन लोगों ने जल्द नए घर में शिफ्ट होने की योजना बनाई थी, उन्हें अपनी प्लानिंग बदलनी पड़ सकती है.

रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन की समस्या बनी रही, तो सीमेंट, स्टील, तांबा और एल्युमीनियम जैसी निर्माण सामग्रियों की कीमतें और बढ़ सकती हैं. इससे निर्माण लागत बढ़ेगी और कई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के पूरा होने में और देरी हो सकती है. वहीं, लाखों घर खरीदारों को अपने सपनों के घर का इंतजार भी लंबा करना पड़ सकता है.

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