रांची: झारखंड में पिछले तीन साल के दौरान 2829 नशा माफियाओं की गिरफ्तारी हुई. जिनमें सजा सिर्फ 395 को हुई. बाकी 2434 लोग साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त हो गए. गृह विभाग की ओर से जारी किए आंकड़े के अनुसार झारखंड पुलिस ने तीन साल में 2,829 गिरफ्तारियां की. इस दौरान 395 अभियुक्तों के विरुद्ध दोषसिद्ध हुआ. पुलिस के अभियान के दौरान सप्लाई चेन पर फोकस कर इंटर-डिस्ट्रिक्ट नेटवर्क, स्टोरेज पॉइंट और फाइनेंशियल ट्रेल को निशाना बनाया गया. जब्ती के बाद केस डायरी की समयबद्ध तैयारी, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों की सुरक्षा जैसे कदमों से ट्रायल मजबूत हुए. इसी का परिणाम है कि कई मामलों में अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया, जबकि कमजोर साक्ष्य वाले मामलों में दोषमुक्ति भी हुई.

पिछले तीन साल में मादक द्रव्य अपराध पर झारखंड पुलिस की कार्रवाई:
– साल 2023 में 529 कांड दर्ज हुए. जिनमें 773 अभियुक्त गिरफ्तार हुए. इनमें से 137 दोषी साबित हुए और 328 दोष मुक्त हुए.
– साल 2024 में 803 कांड दर्ज हुए.इनमें से 1062 अभियुक्त गिरफ्तार हुए.सिर्फ से 22 दोषी साबित हुए और 781 दोष मुक्त हुए.
– साल 2025 में 782 कांड दर्ज हुए.इनमें से 994 अभियुक्त गिरफ्तार हुए.और सिर्फ से 236 दोषी साबित हुए और 621 दोष मुक्त हुए.
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नशा विरोधी कार्रवाई का असर, नेटवर्क पर बढ़ा दबाव:
मादक द्रव्य मामलों में लगातार गिरफ्तारी और दोषसिद्धि से राज्य में नशा तस्करी नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है. झारखंड पुलिस की सख्त कार्रवाई से सप्लाई चेन कमजोर होने और नए लोगों के इस धंधे में शामिल होने पर रोक लगने की उम्मीद है. मजबूत साक्ष्य और प्रभावी पैरवी से अदालतों में सजा की दर पहले की तुलना बढ़ने लगी है,जिसका निवारक प्रभाव दिख रहा है. पुलिस का मानना है कि संगठित गिरोहों के वित्तीय स्रोतों तक पहुंच बनाकर बड़े नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जा रही है.

