- दारोगा दम्पति पर नाबालिग बच्ची से बाल मजदूरी, मारपीट व प्रताड़ना का गंभीर आरोप..!
- महिला थाना प्रभारी व उनके एसआई पति के संयुक्त सरकारी आवास में CWC की बड़ी कार्रवाई, दर्ज होगी एफआईआर..?
- शाहिद नामक शख्स का भी नाम आया सामने, पढ़ाई छुड़ाकर बाल मजदूरी में धकेलने का बच्ची नें लगाया आरोप..?
सूर्यकांत कमल
Chatra: कानून की रक्षा और कमजोरों को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, अगर उन्हीं वर्दीधारी रहनुमाओं पर कानून का माखौल उड़ाने का गंभीर आरोप लग जाए तो सिस्टम से लोगों का भरोषा न सिर्फ टूटने लगता है, बल्कि महकमे की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही सनसनीखेज मामला चतरा में प्रकाश में आया है. जहां महिला थाना प्रभारी पुलिस अवर निरीक्षक फिरदौस नाज और उनके एसआई पति टीपू अंसारी पर एक नाबालिग बच्ची को अपने सरकारी आवास में गैरकानूनी तरिके से रखकर उससे बाल मजदूरी कराने, मारपीट व प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगे हैं. मामले की शिकायत मिलने के बाद बाल कल्याण समिति (CWC) की विशेष दल ने कार्रवाई करते हुए सदर थाना परिसर स्थित पुलिस पदाधिकारी दम्पति के संयुक्त सरकारी आवास में छापेमारी की. बताया जा रहा है कि CWC की टीम के समक्ष बच्ची ने महिला थाना प्रभारी और उनके एसआई पति द्वारा कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने की बात स्वीकार की है. सूत्रों के अनुसार CWC ने महिला थाना प्रभारी के आवास से बच्ची को घायलावस्था में रेस्क्यू किया है. रेस्क्यू के दौरान बच्ची के चेहरे पर चोट के निशान भी पाए गए हैं. इसके बाद बाल कल्याण समिति की टीम ने उसका मेडिकल भी कराया है. मौके से बच्ची को मुक्त कराने के बाद उसे बाल देखभाल संस्थान (CCI) भेज दिया गया है. साथ ही बेंच आफ मजिस्ट्रेट के समक्ष बच्ची का बयान दर्ज करने के बाद CWC द्वारा कानून के अनुसार दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

एक माह पहले ही संभाला था महिला थाना का प्रभार..!
गौरतलब है कि पुलिस अवर निरीक्षक फिरदौस नाज ने करीब एक माह पूर्व ही चतरा महिला थाना प्रभारी का प्रभार संभाला है. इससे पहले वह सदर थाना में पदस्थापित थीं. वहीं उनके पति पुलिस अवर निरीक्षक टीपू अंसारी वर्तमान में भी सदर थाना में तैनात हैं. दोनों पति-पत्नी सदर थाना परिसर में स्थित सरकारी आवास में रहते हैं. आरोप है कि इसी सरकारी आवास में नाबालिग बच्ची से काम कराया जा रहा था और काम नहीं करने पर उसके साथ बेरहमी से मारपीट व उसे कथित रूप से प्रताड़ित भी किया जाता था.
CWC ने की कार्रवाई की पुष्टि, मंगलवार को दर्ज कराई जाएगी प्राथमिकी..!
मामले में CWC के चेयरपर्सन नर्मदेश्वर सिंह ने कार्रवाई की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि बच्ची को रेस्क्यू करने के बाद उसका बयान बेंच ऑफ मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज करते हुए मेडिकल जांच की प्रक्रिया की जा रही है. साथ ही पूरे घटनाक्रम की जानकारी वरीय अधिकारियों को भी दे दी गई है. उन्होंने बताया कि सीडब्ल्यूसी के नियमों के अनुसार मामले में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. चेयरपर्सन ने बताया कि मंगलवार को कागजी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद सभी दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा दी जाएगी.
CCTV की हुई जांच तो होंगे चौकाने वाले खुलासे..?
बताते चलें कि महिला थाना प्रभारी के सरकारी आवास में CCTV कैमरे लगे होने की भी बात सामने आई है. ऐसे में यदि CCTV फुटेज की गहन जांच की जाती है, तो नाबालिग बच्ची के वहां रहने और उसके साथ हुए कथित व्यवहार से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं. शिकायतकर्ताओं ने मामले में सीडब्ल्यूसी की टीम से महिला थाना प्रभारी के घर लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच की मांग की है.
CWC की कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप..!
नाबालिग बच्ची को मुक्त कराने के लिए CWC की कार्रवाई के बाद चतरा पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. स्थानीय समाजसेवियों ने मामले को गंभीर बताते हुए एसपी समेत वरीय पुलिस अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है. समाजसेवियों ने महिला थाना प्रभारी फिरदौस नाज और उनके पति, पुलिस अवर निरीक्षक टीपू अंसारी को तत्काल निलंबित कर अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग उठाई है. उनका आरोप है कि दोनों खाकी की आड़ में कानून का मखौल उड़ा रहे थे, जिसका खुलासा CWC की कार्रवाई के बाद हो चूका है. समाजसेवियों के अनुसार इन दोनों की पोस्टिंग सदर थाना और महिला थाना परिसर में रहने से जांच प्रभावित हो सकती है.
कौन है शाहिद, पढ़ाई छुड़ाकर मजदूरी के दलदल में धकेलने का आरोप..?
महिला थाना प्रभारी के सरकारी आवास में CWC द्वारा की गई कार्रवाई में एक नाम सबसे तेजी से सामने आया है. सीडब्ल्यूसी के बेंच आफ मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान में बच्ची ने शाहिद नामक शख्स के नाम का जिक्र किया है. बच्ची के अनुसार शाहिद नें ही गांव में स्कूल की पढ़ाई छुड़ाकर उसे बाल मजदूरी करने के लिए महिला थाना प्रभारी के सरकारी आवास तक पहुंचाया था, जहां उसके साथ मामूली गलती पर भी कथित तौर पर महिला थाना प्रभारी द्वारा लात-घुस्सो से मारपीट की जाती थी. इस दौरान महिला थाना प्रभारी के पति भी बच्ची के साथ गाली-गलौज करते थे. बयान के अनुसार बच्ची से काम कराने के बदले प्रतिमाह दो हजार रुपये थाना प्रभारी उसकी मां को देती थी.
आरोप बेबुनियाद, षड्यंत्र के तहत बदनाम करने का किया जा रहा प्रयास : थाना प्रभारी
हालांकि इस पूरे मामले में आरोपी महिला थाना प्रभारी फिरदौस नाज और उनके पति पुलिस अवर निरीक्षक टीपू अंसारी ने खुद को निर्दोष बताया है. महिला थाना प्रभारी ने बताया कि बच्ची को उसकी मां लेकर उनके पास आई थी और एक दिन रखकर पढ़ाई लिखाई के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया था. बच्ची की माली हालत को देखकर उसे सहानुभूति के आधार पर मैं अपने घर में रखी थी. दारोगा दम्पति नें अपने ही एक पड़ोस में रहने वाली एक महिला पुलिस अधिकारी पर षड्यंत्र के तहत बदनाम करने की नीयत से सीडब्ल्यूसी को गुमराह कर कार्रवाई कराने का आरोप लगाया है. सब इंस्पेक्टर दंपति ने कहा है की बच्ची के साथ किसी भी तरह की ज्यादती और मारपीट नहीं की जाती थी.

