रिपोर्ट: सुशील कुमार सिंह, गुमला
गुमला. गुमला जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. जिले से कई चिकित्सकों के तबादले के बाद उनके स्थान पर एक भी नए डॉक्टर की पोस्टिंग नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाओं के और कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है. इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों ने भी चिंता व्यक्त की है.
नए चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने पर बढ़ रही नाराजगी
सरकार द्वारा हाल में गुमला जिले के पांच चिकित्सकों का तबादला किए जाने की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि जिन स्वास्थ्य केंद्रों से चिकित्सकों का स्थानांतरण किया गया, वहां पहले से ही डॉक्टरों की भारी कमी थी और कई जगह एक ही चिकित्सक के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हो रही थीं. ऐसे में नए चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ रही है. भाजपा के पूर्व विधायक कमलेश उरांव ने कहा कि सरकार आदिवासियों के हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन गुमला जैसे आदिवासी बहुल जिले में डॉक्टरों की कमी दूर करने के बजाय यहां से चिकित्सकों का तबादला कर दिया गया. उन्होंने कहा कि इससे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और लाचार हो जाएगी.


स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम की जरूरत
भाजपा के पूर्व सांसद सुदर्शन भगत ने भी मामले को चिंताजनक बताया. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में इलाज और एंबुलेंस सुविधा समय पर नहीं मिलने के कारण कई घटनाएं सामने आई हैं और सरकार को स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.

पर्याप्त चिकित्सकों की नियुक्ति करने की मांग
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सरकार से गुमला जिले में पर्याप्त चिकित्सकों की नियुक्ति करने की मांग की है. उनका कहना है कि पहले से संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे जिले में लगातार तबादले होने से ग्रामीण और गरीब मरीजों की परेशानियां और बढ़ेंगी. हालांकि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. जिले के लोगों की मांग है कि तत्काल डॉक्टरों की नई नियुक्ति कर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए, ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े.
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