Ranchi: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 14 मई 2024 के सर्कुलर, हिरासत में मौत, गुमशुदगी और दुष्कर्म के मामलों में अनिवार्य न्यायिक जांच की व्यवस्था वापस ले ली गई थी. इस सर्कुलर को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई करने के आग्रह को झारखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्वीकार कर लिया. खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अगस्त 2026 की तिथि निर्धारित की है. याचिका में एनएचआरसी के 14 मई 2024 के सर्कुलर को रद्द करने की मांग की गई है. आयोग ने इस सर्कुलर के माध्यम से चार सितंबर 2020 के अपने पूर्व सर्कुलर को निरस्त कर दिया था, जिसमें पुलिस या न्यायिक हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत, गुमशुदगी अथवा दुष्कर्म के प्रत्येक मामले में न्यायिक जांच अनिवार्य की गई थी. आयोग ने कहा था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) लागू होने के बाद पूर्व सर्कुलर अप्रभावी हो गया है. याचिका में यह भी कहा गया है कि एनएचआरसी ने बीएनएसएस की धारा 194(4) और 196(2) की गलत व्याख्या की है. याचिकाकर्ता के अनुसार धारा 194(4) केवल कार्यपालक दंडाधिकारी को प्रारंभिक जांच (इनक्वेस्ट) का अधिकार देती है, जिसका उद्देश्य मृत्यु के प्रथमदृष्टया कारणों का पता लगाना है.

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