Saraikela: समाहरणालय सभागार में आज उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी नीतीश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जल जीवन मिशन अंतर्गत संचालित बहु ग्राम जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक हुई. बैठक में उप विकास आयुक्त रीना हांसदा, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, सरायकेला, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता एवं संबंधित योजनाओं के संवेदक उपस्थित रहे. बैठक में बहु ग्राम जलापूर्ति योजनाओं की योजनावार अद्यतन प्रगति, कार्य निष्पादन की स्थिति तथा लंबित कार्यों की समीक्षा की गई. समीक्षा के क्रम में विभिन्न विभागों से लंबित अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) प्राप्त करने की स्थिति तथा स्थानीय स्तर पर उत्पन्न विवादों के निष्पादन की भी समीक्षा की गई. उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को विभिन्न विभागों से लंबित NOC प्राप्त करने के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करते हुए मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने स्थानीय स्तर पर उत्पन्न विवादों का संबंधित पक्षों के साथ समन्वय स्थापित कर शीघ्र समाधान कराने तथा ऐसे मामलों के कारण योजनाओं के कार्यान्वयन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होने देने का निर्देश दिया.

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समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने का निर्देश
समीक्षा के दौरान जिन योजनाओं में कार्य की प्रगति अपेक्षित नहीं पाई गई, उपायुक्त ने संबंधित संवेदकों से विलंब के कारणों की जानकारी ली तथा शेष कार्यों में तेजी लाते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया. उन्होंने कार्यपालक अभियंता को सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग एवं सतत अनुश्रवण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आवश्यक कार्यों में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही करने वाले संवेदकों के संबंध में विभाग को अवगत कराते हुए संविदा की शर्तों एवं प्रचलित नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. उपायुक्त ने कहा कि जल जीवन मिशन सरकार की प्राथमिकता वाली योजना है. बहु ग्राम जलापूर्ति योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी है. उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों, अभियंताओं एवं संवेदकों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि योजनाओं के कार्यान्वयन में आ रही तकनीकी, प्रक्रियागत अथवा स्थानीय स्तर की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराया जाए, ताकि ग्रामीण परिवारों को समयबद्ध रूप से पेयजल सुविधा उपलब्ध हो सके.

