सरायकेला: चांडिल बांध पुनर्वास जांच पर विस्थापितों का सवाल, बोले- निष्पक्षता से हो जांच

सरायकेला: चांडिल बांध के RL-180 से RL-183 तक के विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और अनुदान भुगतान को लेकर चल रही जांच पर...

सरायकेला: चांडिल बांध के RL-180 से RL-183 तक के विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और अनुदान भुगतान को लेकर चल रही जांच पर विस्थापित संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. संगठनों का आरोप है कि करीब 13 करोड़ रुपये की विभागीय राशि के भुगतान, विकास पुस्तिकाओं में कथित गड़बड़ी और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों की जांच में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है.

पत्रकारों और विस्थापित प्रतिनिधियों को जांच से दूर रखने का आरोप

विस्थापित संगठनों का कहना है कि जांच अधिकारियों से मिलने पहुंचे कुछ स्थानीय पत्रकारों को सचिव की अनुमति के बिना मिलने से रोक दिया गया. इसको लेकर संगठनों ने सवाल उठाया कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी है, तो स्थानीय दस्तावेजों और मामले की जानकारी रखने वाले पत्रकारों तथा विस्थापित प्रतिनिधियों से बातचीत करने में आपत्ति क्यों है. संगठनों ने कहा कि स्थानीय लोगों के पास पुनर्वास से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, सर्वेक्षण और परिवारों की वास्तविक स्थिति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद है. ऐसे में जांच के दौरान उनके पक्ष को भी सुना जाना चाहिए.

जांच अधिकारियों की मेहमाननवाजी पर भी सवाल

विस्थापितों ने आरोप लगाया कि जिस पुनर्वास कार्यालय की कार्यप्रणाली की जांच की जा रही है, वहीं से जांच अधिकारियों के लिए खानपान, आवास और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है. विस्थापित संगठनों का कहना है कि जांचाधीन कार्यालय की ओर से जांच टीम की मेहमाननवाजी किए जाने से जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने जांच टीम की सुविधाओं और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की मांग की है.

स्थानीय प्रतिनिधियों को जांच समिति में शामिल करने की मांग

संगठनों के अनुसार जांच समिति में मुखिया, पंचायत सचिव, वार्ड सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि या विस्थापित संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया है. विस्थापितों का कहना है कि उनके पास मूल सर्वेक्षण, परिवार संरचना, विकास पुस्तिका और पात्रता से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं. इसलिए जांच में स्थानीय प्रतिनिधियों और प्रभावित परिवारों की भागीदारी जरूरी है.

मूल दस्तावेजों के सत्यापन की मांग

विस्थापित संगठनों ने मांग की है कि जांच केवल सरकारी फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि सभी मूल अभिलेखों का गहन सत्यापन किया जाए. इसके तहत मूल मास्टर कार्ड, मूल विकास पुस्तिका और विभाजित विकास पुस्तिका का मिलान करने की मांग की गई है. इसके अलावा जन्म प्रमाण-पत्र, आधार, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, मेडिकल और दिव्यांगता प्रमाण-पत्र सहित अन्य दस्तावेजों का संबंधित मूल कार्यालय से सत्यापन कराने की मांग की गई है. संगठनों ने ग्राम हेवेन और RL-180 से RL-183 तक की सूची में बाद में जोड़े गए नामों की प्रक्रिया की भी जांच करने को कहा है. साथ ही RL सीमा से बाहर किए गए कथित भुगतानों की अलग से जांच की मांग उठाई गई है.

पात्र विस्थापितों को लाभ नहीं मिलने का आरोप

विस्थापितों ने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोगों को भी पुनर्वास अनुदान दिए जाने की बात सामने आई है, जो निर्धारित RL सीमा के बाहर हैं. वहीं, कई वास्तविक पात्र विस्थापित परिवार अब तक अपने अधिकार के लाभ से वंचित हैं. इसी को लेकर संगठनों ने करीब 13 करोड़ रुपये के सभी भुगतानों का स्वतंत्र ऑडिट कराने और 100 प्रतिशत दस्तावेजी जांच की मांग की है.

विस्थापितों ने रखीं 12 प्रमुख मांगें

विस्थापित संगठनों ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए कई मांगें रखी हैं. इनमें 13 करोड़ रुपये के भुगतान का स्वतंत्र ऑडिट, मूल अभिलेखों का मिलान, नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित आदेशों की जांच तथा सभी प्रमाण-पत्रों का मूल कार्यालय से सत्यापन शामिल है. इसके अलावा ग्राम हेवेन के RL अभिलेखों की जांच, RL सीमा से बाहर हुए भुगतानों की जांच, स्थानीय प्रतिनिधियों और पत्रकारों से तथ्य जुटाने, मूल दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तथा गड़बड़ी मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.

 जांच में सहयोग करना चाहते हैं विस्थापित

विस्थापित संगठनों ने कहा कि उनका उद्देश्य जांच को प्रभावित करना नहीं, बल्कि जांच में सहयोग करना है. उनका कहना है कि यदि जांच केवल सरकारी फाइलों के आधार पर की गई और स्थानीय तथ्यों तथा प्रभावित परिवारों की बातों को नजरअंदाज किया गया, तो जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे. संगठनों ने सरकार और जांच अधिकारियों से निष्पक्ष, पारदर्शी और मूल अभिलेखों पर आधारित जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक पात्र विस्थापित परिवारों को उनका लंबित अधिकार मिल सके.
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