Hazaribagh: जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति मामले को लेकर शुक्रवार की शाम हजारीबाग में छात्रों का आक्रोश देखने को मिला. हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन करने के लिए गांधी मैदान पहुंचे. छात्रों के हाथों में पुतले थे और वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. सूचना मिलने के बाद पुलिस प्रशासन की टीम गांधी मैदान पहुंची और पुतला दहन रोकने तथा छात्रों को वहां से हटाने का प्रयास किया. इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई. देखते ही देखते स्थिति झड़प में बदल गई. प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि उन्हें हटाने के दौरान पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया, जिससे कुछ छात्र आंशिक रूप से घायल हुए हैं. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि भीड़ में मौजूद झारखंड मुक्ति मोर्चा के कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की और लाठी लेकर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे. इससे मौके पर तनाव और बढ़ गया. हालांकि झामुमो से जुड़े लोगों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए इसे बचाव की स्थिति बताया.

प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट का आरोप
गांधी मैदान में बतौर मजिस्ट्रेट मौजूद सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि प्रशासन की ओर से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि गांधी मैदान में कोई पुतला दहन नहीं हुआ है. प्रशासन का उद्देश्य किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था को बिगड़ने से रोकना है. वहीं, जेएसएससी-जेपीएससी रिफॉर्म मंच के सदस्य विनय मेहता ने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया था. इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, लेकिन उनका आरोप है कि राज्य सरकार न्यायालय में अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रख पाई. इसके बाद उच्च न्यायालय ने कैबिनेट के फैसले पर रोक लगा दी. इसी के विरोध में छात्र गांधी मैदान में जुटे थे. विनय मेहता ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि छात्र अपने मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, तो भीड़ के बीच झामुमो से जुड़े लोग लाठी लेकर क्यों पहुंचे. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ मारपीट की गई और इससे प्रदर्शन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया. उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.

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गांधी मैदान में पुलिस की भारी तैनाती
इधर, झामुमो के छात्र नेता चंदन सिंह ने भी प्रदर्शन को लेकर अपना पक्ष रखा. जब उनसे लाठी लेकर गांधी मैदान में मौजूद रहने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि न्यायालय का फैसला आ चुका है और यदि प्रदर्शनकारी पढ़े-लिखे छात्र हैं तो उन्हें न्यायालय के फैसले का सम्मान करना चाहिए. हालांकि पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है, ऐसे में वह खुद लाठी लेकर मौके पर क्यों मौजूद हैं, इस सवाल का वे स्पष्ट और तर्कसंगत जवाब नहीं दे सके. घटना के बाद गांधी मैदान में पुलिस की भारी तैनाती कर दी गई है. जिले के कई थाना प्रभारी और पुलिस पदाधिकारी मौके पर मौजूद हैं. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है. फिलहाल पुतला दहन नहीं हो सका है और गांधी मैदान में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. पुलिस प्रशासन की ओर से किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. वहीं, छात्र संगठन आगे की रणनीति को लेकर मौके पर जुटे हुए हैं.

