Ranchi : झारखंड के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने राज्य के सभी कीटनाशक थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और वितरकों के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए ‘सामयिक सूचना अंक : 01/2026’ जारी की है. विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि कीटनाशक व्यवसाय में अब किसी भी प्रकार की लापरवाही या अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
होगी कड़ी निगरानी
यह सूचना कीटनाशी अधिनियम 1968 और कीटनाशी नियमावली 1971 के प्रावधानों को फिर से रेखांकित करती है. जिसका उद्देश्य मनुष्यों और जीव-जंतुओं को कीटनाशकों से होने वाले खतरों से बचाना है. विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कीटनाशकों का आयात, विनिर्माण, विक्रय, परिवहन और उपयोग अब पूरी तरह से कड़ी निगरानी में होगा.

नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
विभाग ने चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने पर कीटनाशी अधिनियम की धारा 29 के तहत कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी. इसमें लाइसेंस का तत्काल निरस्त, भारी जुर्माना और कारावास या ये तीनों दंड एक साथ दिए जा सकते हैं.
जारी निर्देश में क्या
• लाइसेंस अनिवार्य : बिना वैध अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) के कीटनाशक का कारोबार करना अब सीधा अपराध है.
• प्रतिबंधित उत्पादों पर प्रहार : यदि कोई भी विक्रेता प्रतिबंधित, कूटनामी या अपंजीकृत कीटनाशक बेचते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर धारा 27 के तहत दंडात्मक कार्यवाही होगी.
• प्रिंसिपल सर्टिफिकेट : अब बिना अधिकृत ‘प्रिंसिपल सर्टिफिकेट’ के कीटनाशक बेचना संभव नहीं होगा.
• एक्सपायरी और लेबलिंग : समाप्ति तिथि निकल चुके कीटनाशकों को बेचना कानूनन अपराध है. ऐसे उत्पादों को अलग ‘एक्सपायर’ लेबल के साथ रखना अनिवार्य है. साथ ही, सही पैकिंग और सूचना पत्र (लीफलेट) के बिना माल बेचना भी नियम के विरुद्ध है.
• दस्तावेजीकरण : सभी विक्रेताओं को हर महीने बिक्री का विवरण अनुज्ञापन अधिकारी को भेजना अनिवार्य है.
• सुरक्षा मानक : कीटनाशकों का भंडारण और परिवहन कभी भी खाद्य सामग्री के संपर्क में नहीं आना चाहिए.
• निरीक्षण में बाधा : किसी भी कीटनाशी निरीक्षक को निरीक्षण में सहयोग न देना या उनके काम में बाधा डालना अब भारी पड़ेगा.
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