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JPSC-JSSC वार्ता के लिए बनी उच्च स्तरीय कमेटी से कांग्रेस के फूफा का फिर मुंह फूला, अब उनकी ही पार्टी के लोग कह रहे हैं ‘प्लीज इग्नोर’

Ranchi: झारखंड जल रहा है. छात्र आंदोलन पर बैठे हैं. JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर जो आंदोलन झारखंड में हो...

File Photo
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Ranchi: झारखंड जल रहा है. छात्र आंदोलन पर बैठे हैं. JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर जो आंदोलन झारखंड में हो रहा है, उसके लिए सरकार की गंभीरता अब दिखाई दे रही है. झारखंड सरकार की तरफ से पूरे मामले को वार्ता के तहत शांत करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है. इस कमेटी में सरकार के सभी घटक दल के मंत्री शामिल हैं. कांग्रेस से दीपिका पांडे सिंह, झारखंड मुक्ति मोर्चा से चमरा लिंडा और सुदिव्य कुमार सोनू, तो वहीं राजद की तरफ से संजय प्रसाद यादव इस कमेटी में शामिल हैं. कमेटी बनने के बाद एक राहत की सांस आंदोलनरत छात्रों ने भी ली है. इससे पहले सरकार की तरफ से रांची प्रशासन के दो अधिकारियों को छात्रों से बात करने के लिए भेजा गया था. हालांकि छात्रों ने किसी भी तरह की प्रतिनिधि मंडल बनाने से मना कर दिया. उनका कहना है कि वह जो भी वार्ता करेंगे खुले आसमान के नीचे और कैमरे के सर्विलांस में करेंगे. खैर, यह तो बाद की बात है. अब जो बात सामने आ रही है वो और चौंकाने वाली है. सरकार की तरफ से जो उच्चस्तरीय कमेटी बनी है, उससे सरकार के ही कुछ एक वरिष्ठ मंत्री नाराज नजर आ रहे हैं. आईए जानते हैं यह मंत्री जी कौन है.

वार्ता के लिए बनी कमेटी को सर्विलांस वाली कमेटी बता रहे हैं राधा कृष्ण किशोर

न्यूज वेव झारखंड ने सबसे पहले यह खबर चलायी की सरकार की तरफ से एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जा रहा है. कमेटी बनने के बाद सरकार के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर एक विवादित बयान देते है. वो पूरी मीडिया के सामने कहते है कि जो कमेटी बनी है, वो सिर्फ छात्रों की तरफ से होने वाले आंदोलन पर नजर रखेगी. इतने पर राधा कृष्ण किशोर नहीं रुकते हैं, आगे वो कहते हैं कि छात्रों से वार्ता करने का जिम्मा कमेटी के पास नहीं है. जबकि सरकार की तरफ से यह साफ हो चुका है कि यह कमेटी पूरे मामले को समझने, परखने और रास्ता निकालने के लिए बनी है.

तो फिर क्यों मुंह फूला लिए मंत्री जी

हर बार की तरह इस मामले में भी मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने एक विवादित बयान देकर अपने ही पार्टी के लोगों से गिरने का काम किया है. इस मामले पर हमारी टीम ने जब कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों से बात की तो उन्होंने साफ तौर से कहा कि इस मामले को कृपया कर इग्नोर करें. क्योंकि उन्हें पार्टी में भी अब कोई सीरियसली नहीं ले रहा है. वह हर बार चाहते हैं कि उनका ही नाम सभी जगह हो. वही हर गंभीर मुद्दे पर बात करें, और सरकार पूरी तरह से उन पर फोकस रहे. लेकिन उन्हें ऐसा तवज्जो सरकार में नहीं मिल रहा है. जिससे उनका गुस्सा होना बार-बार दिख रहा है. ऐसे में कांग्रेस के लोगों की बात मानकर सभी उन्हें इग्नोर कर रहे हैं.

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