छात्र आंदोलन में जिन्होंने संभाली लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी वो भी हुए बेरोजगार, पढ़िए नौकरी खो चुके सत्यम और इन जैसे अफसरों की कहानी

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi: JPSC और JSSC परीक्षाओ में अनियमियता के मुद्दे पर छात्रों ने पिछले दिनों बड़ा आंदोलन किया था. आंदोलन...

JPSC exam controversy
Those who handled law and order duties during student protests have also become unemployed

विनीत आभा उपाध्याय

Ranchi: JPSC और JSSC परीक्षाओ में अनियमियता के मुद्दे पर छात्रों ने पिछले दिनों बड़ा आंदोलन किया था. आंदोलन का दिन था सोमवार और तारीख थी 10 अगस्त. उस दिन की तपती सुबह और विधानसभा गेट नंबर एक के माहौल में चारों तरफ आक्रोशित छात्रों का हुजूम, गूंजते नारे और बढ़ता तनाव था और इसी भारी गहमागहमी के बीच बुढ़मू प्रखंड के कल्याण पदाधिकारी सत्यम कुमार मुस्तैदी से डटे थे. कंधे पर जिम्मेदारी का भारी बोझ था की छात्र आंदोलन के दौरान विधि-व्यवस्था बिगड़ने न पाए. सत्यम अकेले नहीं थे, उनके साथ कृष्ण कुमार भी दिन-रात एक कर लॉ एंड ऑर्डर (Law and Order) बनाए रखने की जद्दोजहद में लगे थे. वहीं दूसरी ओर मांडर के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी संदीप केरकेटा भी अपने प्रखंड के दफ्तर और फाइलों को छोड़कर सड़कों पर मोर्चा संभाले हुए थे.

कल तक हुक्म चलाने वाले अधिकारी आज खुद भविष्य की चिंता में

इस पूरे छात्र आंदोलन के दौरान ये अफसर सरकार और व्यवस्था का चेहरा बनकर आंदोलनकारियों के सामने ढाल की तरह खड़े रहे. भूख-प्यास भूलकर अपनों की चिंता छोड़कर कड़कड़ाती धूप, बारिश के मौसम और तनाव भरे माहौल में उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाई. उन्हें लगा था कि व्यवस्था की रक्षा में बहाया गया उनका यह पसीना उनकी काबिलियत और निष्ठा का प्रमाण बनेगा. लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था. जैसे ही आंदोलन का शोर थमा, छात्रों की मांगे मानी गई और सड़कों का सन्नाटा लौटा और इन अफसरों की दुनिया ही पलट गई. जिन हाथों ने कल तक राज्य की व्यवस्था संभाली थी आंदोलन खत्म होते ही वही हाथ अचानक खाली हो गए. सत्यम कुमार, संदीप केरकेटा, अनुनय कुमार अमन और कृष्ण कुमार जैसे कई अफसरों को अचानक सेवा से मुक्त कर दिया गया. एक ही झटके में उनसे उनका पद उनकी पहचान और उनकी आजीविका छीन गई. कल तक जो अधिकारी सड़कों पर हुक्म चला रहे थे भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे आज वे खुद भविष्य की अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिए गए हैं.

सरकारी नौकरी गई, अब बेरोजगारी और परिवार की चिंता ने घेरा

आज इन अधिकारियों के घरों में एक अजीब-सा सन्नाटा पसरा हुआ है. जिस प्रशासनिक रौब पर कभी उनके परिवार को नाज था आज वहां सिर्फ बेबसी और हताशा है. सत्यम, संदीप और कृष्ण कुमार जैसे कई युवा अफसरों के सामने अब सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं बल्कि आत्मसम्मान का है. सड़कों का आंदोलन तो खत्म हो गया है लेकिन इन अफसरों के दिलों में बेरोजगारी और बेबसी का जो बवंडर उठा है वो शांत होता नहीं दिख रहा है. अनुनय कुमार अमन फिलहाल आपूर्ति पदाधिकारी बेड़ो प्रखंड में 10 अगस्त को इनकी ड्यूटी थी लॉ एंड आर्डर संभालने में लगी हुई थी. लेकिन अब ये भी सरकारी कर्मचारी से बेरोजगार की श्रेणी में आ गए हैं. नौकरी खो चुके युवाओं को अब अपने साथ साथ आपके और अपने परिवार की चिंता सता रही है.

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