
पलामू: जिले के निजी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही री-एडमिशन के नाम पर अवैध वसूली का खेल शुरू हो गया है. निजी स्कूलों द्वारा हर साल पुनः नामांकन के नाम पर मोटी रकम वसूलने से अभिभावकों की कमर टूट रही है और उनमें गहरा आक्रोश व्याप्त है.
अभिभावकों ने जताई नाराजगी
अभिभावकों का कहना है कि एक ही स्कूल में पढ़ रहे बच्चों से हर साल एडमिशन शुल्क लेना पूरी तरह से अनुचित है. इसे लेकर लगातार विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं.
गढ़वा में जारी हो चुकी है सख्त गाइडलाइन
गौरतलब है कि पड़ोसी जिले गढ़वा में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जिसके बाद गढ़वा उपायुक्त (DC) ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है.
री-एडमिशन शुल्क पर लगाया गया प्रतिबंध
गढ़वा प्रशासन ने आदेश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में री-एडमिशन के नाम पर शुल्क न लिया जाए और उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
पलामू में भी कार्रवाई की उठी मांग
अब पलामू के अभिभावक भी प्रशासन से इसी तरह की पहल की उम्मीद कर रहे हैं. कमोबेश जिले के हर बड़े और छोटे निजी स्कूल में यही स्थिति है, जहां विकास शुल्क और री-एडमिशन के नाम पर परिजनों को परेशान किया जा रहा है.
आर्थिक शोषण से राहत की मांग
जिले के जागरूक नागरिकों और अभिभावकों ने पलामू उपायुक्त से मांग की है कि गढ़वा की तर्ज पर पलामू में भी री-एडमिशन शुल्क पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, ताकि आम जनता को इस आर्थिक शोषण से राहत मिल सके.
