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जब DC को याद रही दादाजी की इच्छा… स्टेडियम में मैच देखा तो छलक पड़ी खुशी, भावुक कर गई यह तस्वीर

Ranchi: किसी बुजुर्ग की छोटी-सी ख्वाहिश पूरी करने के लिए बस संवेदनशील सोच की जरूरत होती है. रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री...

डूरंड कप मुकाबला देखने स्टेडियम पहुंचे वृद्धाश्रम के बुजुर्ग
डूरंड कप मुकाबला देखने स्टेडियम पहुंचे वृद्धाश्रम के बुजुर्ग

Ranchi: किसी बुजुर्ग की छोटी-सी ख्वाहिश पूरी करने के लिए बस संवेदनशील सोच की जरूरत होती है. रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया. नगड़ी वृद्धाश्रम के एक बुजुर्ग की डूरंड कप का फुटबॉल मैच स्टेडियम में बैठकर देखने की इच्छा को उन्होंने न सिर्फ गंभीरता से लिया, बल्कि उसे हकीकत में भी बदल दिया.

वृद्धाश्रम में जताई थी मैच देखने की इच्छा

कुछ दिन पहले उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री अपने नियमित दौरे पर नगड़ी स्थित वृद्धाश्रम पहुंचे थे. वहां बुजुर्गों से बातचीत के दौरान एक दादाजी ने मोरहाबादी के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में डूरंड कप का मुकाबला देखने की इच्छा जताई. उपायुक्त ने उसी समय अधिकारियों को व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.

आज जब दादाजी स्टेडियम पहुंचे तो जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया. उन्हें सम्मान के साथ बैठने की व्यवस्था कराई गई, ताकि वे आराम से पूरे मैच का आनंद ले सकें.

उपायुक्त की संवेदनशीलता ने छुआ सभी का दिल

इस पूरी घटना का सबसे भावुक पल तब आया, जब व्यस्त कार्यक्रम के बीच भी उपायुक्त को यह याद रहा कि आज वृद्धाश्रम से दादाजी मैच देखने आने वाले हैं. उन्होंने स्वयं संबंधित अधिकारी से फोन पर पूछा कि दादाजी कहाँ बैठे हैं, उनकी व्यवस्था ठीक है या नहीं और उनकी तस्वीर भी मंगवाई. यह जानकर वहां मौजूद अधिकारी भी भावुक हो गए कि उपायुक्त ने एक बुजुर्ग की इच्छा को केवल पूरा ही नहीं किया, बल्कि उसकी पल-पल की चिंता भी की.

मैच के दौरान अधिकारियों ने दादाजी का पूरा ध्यान रखा. पहली बार स्टेडियम का माहौल, हजारों दर्शकों का उत्साह और मैदान पर खिलाड़ियों का रोमांचक मुकाबला देखकर उनके चेहरे पर जो मुस्कान थी, वही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता बन गई.

वृद्धाश्रम परिवार ने उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी उन्होंने जिस संवेदनशीलता, अपनापन और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का परिचय दिया, वह दूसरों के लिए भी प्रेरणा है. एक छोटी-सी इच्छा पूरी कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि इंसानियत और संवेदनशीलता ही किसी अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान होती है.

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