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घाघीडीह जेल से गैंग चला रहा था सुजीत सिन्हा, AK-47 से होनी थी गैंगस्टर अखिलेश सिंह की हत्या, पुलिस ने नाकाम की थी साजिश

Jamshedpur: झारखंड में संगठित अपराध और सलाखों के पीछे से चल रहे आपराधिक नेटवर्क पर एक बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस मुठभेड़...

Sujit Sinha was running a gang from Ghaghidih jail; gangster Akhilesh Singh was to be murdered with an AK-47, but the police foiled the plot.
अखिलेश सिंह

Jamshedpur: झारखंड में संगठित अपराध और सलाखों के पीछे से चल रहे आपराधिक नेटवर्क पर एक बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का साम्राज्य केवल जेल के बाहर तक सीमित नहीं था, बल्कि घाघीडीह सेंट्रल जेल के भीतर से भी वह बेखौफ होकर अपने गिरोह की कमान संभाल रहा था. पुलिस रिमांड के दौरान सुजीत सिन्हा द्वारा किए गए सनसनीखेज खुलासों के बाद कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह की हत्या की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया.

एके-47 और विदेशी पिस्तौलों से रची गई थी हत्या की साजिश

सुजीत सिन्हा ने पूछताछ में खुलासा किया था कि अखिलेश सिंह की हत्या की पूरी योजना उसी के पूर्व करीबी और भरोसेमंद सहयोगी सुधीर दुबे ने बनाई थी. सुधीर दुबे (मूल निवासी: ढकाइच, थाना कृष्णाब्रह्म, जिला बक्सर, बिहार) कभी अखिलेश गैंग का मुख्य सदस्य था, लेकिन बाद में वर्चस्व और आपसी विवाद के कारण दोनों के बीच कट्टर दुश्मनी हो गई.

नागालैंड से एक एके-47 राइफल मंगवाई गई थी

इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड को अंजाम देने के लिए हथियारों का बड़ा जखीरा जुटाया गया था नागालैंड से आपूर्ति एक एके-47 राइफल मंगवाई गई थी. नागालैंड के जरिए ही चार आधुनिक पिस्तौलें मंगाई गईं, जिनमें दो बरेटा और दो 200 जेड कंपनी की पिस्तौलें शामिल थीं. इन पिस्तौलों को लगभग साढ़े तीन-तीन लाख रुपये की भारी-भरकम राशि में खरीदा गया था. पुलिस ने इस इनपुट पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरी योजना को नाकाम कर दिया. वर्तमान में अखिलेश सिंह दुमका जेल में बंद है.

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जेल के भीतर से चलता था रंगदारी और हत्या का नेटवर्क

घाघीडीह जेल में बंद रहने के बावजूद सुजीत सिन्हा का आपराधिक सिंडिकेट बदस्तूर जारी था. सलाखों के पीछे से ही कारोबारियों से रंगदारी वसूलना, शूटरों को नए टास्क देना, हथियारों की खरीद-बिक्री की डीलिंग करना और हत्याओं की साजिश रचना उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था. जेल में छापेमारी के दौरान पुलिस ने सुजीत सिन्हा के पास से 12 से अधिक मोबाइल सिम कार्ड बरामद किए थे. ये सभी सिम कार्ड दूसरों के नामों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी कराए गए थे, जिनका उपयोग वह गिरोह के शूटरों और कारोबारियों से संपर्क साधने के लिए करता था.

सीआईडी की एफआईआर से उजागर हुआ था पूरा नेटवर्क

जेल से गिरोह के संचालन का मामला तब आधिकारिक रूप से सामने आया जब नवंबर 2019 में सीआईडी के तत्कालीन डीएसपी अनिमेष गुप्ता ने परसुडीह थाने में एक औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई. इसके बाद परसुडीह पुलिस ने सुजीत सिन्हा को तीन दिनों की रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की. इस पूछताछ के दौरान उसने हथियारों की अवैध आपूर्ति श्रृंखला और झारखंड भर में फैले आपराधिक नेटवर्क से जुड़े कई अहम राज बेपर्दा किए.

सुधीर दुबे का आपराधिक इतिहास और जेल ट्रांसफर

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुधीर दुबे पर सोनारी निवासी अमित सिंह की हत्या और साकची में हुई गोलीबारी समेत एक दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

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