Ranchi: झारखंड विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के 10 वें दिन उद्योग और श्रम विभाग के बजट पर बोलते हुए जयराम महतो ने कहा कि श्रमिक अदृश्य नायक हैं. लेकिन दिहाड़ी मजदूरों का कोई स्पष्ट ढ़ांचा नहीं है. दुर्घटना की स्थिति में पीएफ, इएसआई और पीएफ की व्यवस्था नहीं है. इनके लिए यूनिक आइडी होना चाहिए. सरकार के पास प्रवासी मजदूरों का गलत डेटा है. कोरोना काल में जब 12 लाख प्रवासी मजदूरों को वापस लाया गया अब सरकार के डेटा में सिर्फ दो लाख ही प्रवासी मजदूर हैं. जयराम महतो ने कहा कि 16 लाख प्रवासी मजदूर दूसरे देश व राज्यों में काम करते हैं.
नियोजन नीति नहीं होने के कारण युवाओ के साथ हो रहा धोखा : जयराम
जयराम महतो ने कहा कि नियोजन नीति नहीं होने के कारण युवाओ के साथ धोखा हो रहा है. यहां की आदिवासी महिलाएं दूसरे राज्यों में झाड़ू पोछा लगाने का काम कर रही हैं. नियोजन नीति नहीं होने के कारण दूसरे राज्यों के लोगों को यहां नौकरी मिल रही है. यहां भाषा के आधार पर परीक्षा ली जानी चाहिए. जयराम महतो ने सीएंम हेमंत सोरेन के बयान को लेकर टिप्पणी की. इस पर संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पीकर से उक्त टिप्पणी को प्रोसिडिंग से हटाने का आग्रह किया.
सरकार ने कौशल विकास पर किया है फोकसः दशरथ गगराई
वहीं दशरथ गगराई ने कहा कि सरकार ने कौशल विकास पर फोकस किया है. प्रवासी मजदूरों का निबंधन होना चाहिए. निर्माण कार्य से जुड़े 4 लाख मजदूरों का निबंधन किया गया है. रोजगार मेला के जरीए 13 हजार को रोजगार दिया गया है. उद्योग के लिए संतुलित बजट है. तसर सिल्क को बढ़ावा देने की जरूरत है.
श्रम विभाग पर बोलने में आ रही शर्मः आलोक चौरसिया
आलोक चौरसिया ने कहा कि श्रम विभाग पर बोलने पर शर्म आ रही है. युवा बेरोजगार घूम रहे हैं. रोजगार की कोई ठोस योजना नहीं है. पलामू और गढ़वा में सबसे अधिक बेरोजगारी है. श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा नहीं है. कौशल विकास केंद्र कागजों पर चल रहा है. सरकार का लोक लुभावन घोषणा पत्र है. सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी का है. पलामू में पानी की व्यवस्था की जानी चाहिए.
