Gumla: झारखंड सरकार के अपर सचिव, वित्त-सह-निदेशक, कोषागार एवं संस्थागत वित्त कर्ण सत्यार्थी (आईएएस) ने शनिवार को बसिया प्रखंड के लोहरी गांव का भ्रमण किया. इस दौरान उन्होंने ग्राम सभा और ग्रामीणों के साथ संवाद कर वन अधिकार अधिनियम (FRA) एवं सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना (CFRMP) के क्रियान्वयन की समीक्षा की. भ्रमण का उद्देश्य समुदाय आधारित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की प्रगति का आकलन करना था.
अधिकारियों ने किया ग्राम सभा से संवाद
भ्रमण के दौरान जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक रंजन, बसिया की प्रखंड विकास पदाधिकारी सुप्रिया भगत, कमडारा के अंचल अधिकारी, जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी तथा प्रदान (PRADAN) संस्था की टीम भी मौजूद रही. अधिकारियों ने ग्राम सभा के सदस्यों के साथ खुली बैठक कर वन अधिकार, आजीविका, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्राम विकास से जुड़े अनुभवों की जानकारी ली.
CFRMP से बदल रही गांव की तस्वीर
ग्राम सभा के प्रतिनिधियों ने बताया कि सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना गांव के समग्र और सतत विकास का आधार बन चुकी है. इसी योजना के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का अभिसरण किया जा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा के तहत 35 जलग्रहण तालाब (डोभा) बनाए गए हैं, जिससे वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर में सुधार और कृषि एवं वन क्षेत्र को लाभ मिला है.

आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों पर विशेष जोर
ग्रामीणों ने बताया कि ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के माध्यम से ग्राम सभा की संस्थागत क्षमता मजबूत हुई है. इससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं की प्राथमिकता तय करने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में समुदाय की भागीदारी बढ़ी है. भ्रमण के दौरान अधिकारियों को आम बागवानी, उन्नत टमाटर खेती, वनरोपण और सीडबॉल अभियान सहित एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (INRM) की विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन भी कराया गया.
सीडबॉल अभियान से बढ़ रहा वन क्षेत्र
ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय वन प्रजातियों के हजारों सीडबॉल क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों में फैलाए गए हैं. इससे प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा मिला है और जैव विविधता संरक्षण के साथ वन आच्छादन में भी वृद्धि हो रही है.
लोहरी मॉडल को बताया अनुकरणीय
भ्रमण के बाद अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी ने ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी और समुदाय आधारित विकास मॉडल की सराहना की. उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, विभिन्न योजनाओं का अभिसरण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सतत विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में लोहरी गांव का मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी है. अधिकारियों ने भी ग्राम सभा की भूमिका की प्रशंसा करते हुए इसे जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, पर्यावरणीय संतुलन और आजीविका विकास के लिए प्रभावी एवं अनुकरणीय मॉडल बताया.
AlSO READ : पीएम मोदी का सेशेल्स दौरा : हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी रहे मौजूद



