Gumla: सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं, अभिभावकों और विद्यालय परिवार ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में बढ़ती गलत आदतों, नशे की प्रवृत्ति और सामाजिक मूल्यों के क्षरण जैसे विषयों पर चर्चा कर समाधान तलाशना था.
विद्यालय के साथ समाज और परिवार की भूमिका भी जरूरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्राचार्य ने कहा कि विद्यालय बच्चों को बेहतर वातावरण देने का प्रयास करता है, लेकिन विद्यालय से बाहर घर और समाज में भी उन्हें सकारात्मक माहौल मिलना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि पहले समाज बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखता था, जिससे उनका व्यक्तित्व बेहतर बनता था, लेकिन वर्तमान समय में सामाजिक जिम्मेदारी कम होती जा रही है. उन्होंने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी.

वार्ड पार्षद नूतन रानी ने कहा कि युवा पीढ़ी में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति समाज और देश के लिए चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि केवल बच्चों की सुविधाओं पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके संस्कार और सही मार्गदर्शन पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा.
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जागरूकता बढ़ाने पर दिया जोर
सामाजिक कार्यकर्ता पायल तिवारी ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों को जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़कर उनके भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए, ताकि वे सही और गलत का अंतर समझ सकें और अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगा सकें. वहीं सामाजिक कार्यकर्ता रानी कुमारी सिंह ने कहा कि बच्चे मिट्टी की तरह होते हैं, जिन्हें शुरुआत से जैसा वातावरण मिलता है, उनका व्यक्तित्व उसी दिशा में विकसित होता है. उन्होंने कहा कि यदि समाज का कोई भी बच्चा गलत रास्ते पर जा रहा है तो उसे सही दिशा दिखाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है.
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को विद्यालयों के साथ-साथ ग्रामीण और सामाजिक स्तर पर भी आयोजित करने की आवश्यकता बताई. सभी ने कहा कि सामूहिक प्रयास, संवाद और सकारात्मक वातावरण के माध्यम से ही बच्चों का भविष्य सुरक्षित और समाज को बेहतर बनाया जा सकता है.


