Ranchi: आज के आधुनिक डिजिटल और तकनीकी युग में फिंगर प्रिंट पूरे विश्व की पुलिस के लिए अपराधियों तक पहुंचने और उन्हें पकड़ने का सबसे कारगर हथियार साबित हुआ है. फिंगर प्रिंट के जरिए कई ऐसे ब्लाइंड केस सुलझाए गए हैं. विश्व भर में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं. इतिहास ही नहीं, वर्तमान में भी कई ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जिनमें फिंगर प्रिंट के माध्यम से कई अनसुलझे मर्डर, लूट, डकैती व चोरी की घटनाओं को सुलझाया गया है.

फिंगर प्रिंट की शुरुआत कब हुई
लेकिन क्या आपको पता है कि फिंगर प्रिंट लेने की शुरुआत कब हुई थी. वर्ष 1858 में पहली बार किसी व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने के लिए फिंगर प्रिंट का उपयोग किया गया, जिसने आगे चलकर आधुनिक फॉरेंसिक साइंस और पहचान प्रणाली की नींव रखी. वर्ष 1858 में ब्रिटिश भारतीय सिविल सेवा के अधिकारी सर विलियम जेम्स हर्शेल ने पहचान सुनिश्चित करने के लिए पहली बार फिंगर प्रिंट (अंगुलियों के निशान) का प्रयोग किया. यह प्रयोग बाद में आधुनिक पहचान प्रणाली और फॉरेंसिक साइंस का मील का पत्थर साबित हुआ.
ICS अधिकारी हर्शेल का प्रयोग
बंगाल के हुगली जिले में कार्यरत भारतीय सिविल सेवा (आईसीएस) के अधिकारी हर्शेल ने एक स्थानीय ठेकेदार से अनुबंध के दौरान उसके हाथ की हथेली और उंगलियों के निशान लिए थे. उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि संबंधित व्यक्ति भविष्य में अपने समझौते से मुकर न सके. बाद में उन्होंने पाया कि प्रत्येक व्यक्ति के फिंगर प्रिंट अलग होते हैं और जीवनभर लगभग अपरिवर्तित रहते हैं.
पहचान के लिए मील का पत्थर साबित हुआ फिंगर प्रिंट
हर्शेल के इस प्रयोग ने पहचान सत्यापन की एक नई और विश्वसनीय प्रणाली को जन्म दिया. आगे चलकर फिंगर प्रिंट तकनीक का उपयोग अपराधों की जांच, न्यायिक प्रक्रिया, सरकारी अभिलेखों, पासपोर्ट, बैंकिंग और पहचान संबंधी अनेक क्षेत्रों में व्यापक रूप से होने लगा.
आधुनिक युग में विशिष्ट पहचान बन गया फिंगर प्रिंट
आधुनिक युग में अंगूठे का फिंगर प्रिंट लोगों की विशिष्ट पहचान बन गया है. आधार कार्ड में फिंगर प्रिंट लोगों की विशिष्ट पहचान का प्रमुख आधार है. देश भर में आधार कार्ड की मान्यता है. इसमें प्रत्येक व्यक्ति को एक यूनिक नंबर दिया गया है, जिससे उस व्यक्ति की खास पहचान होती है. इसमें भी अंगूठे के फिंगर प्रिंट से संबंधित व्यक्ति का पूरा बायोडाटा प्राप्त किया जाता है.

पुलिस विभाग रखता है अपराधियों का फिंगर प्रिंट रिकॉर्ड
ऐसे तो फिंगर प्रिंट हमेशा से कारगर सिद्ध हुआ है, लेकिन 1 जुलाई 2024 से लागू बीएनएस और बीएनएसएस ने फिंगर प्रिंट को अनुसंधान के लिए और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है. अब घटनास्थल पर पहुंचते ही अनुसंधान अधिकारी (आईओ) को अन्य साक्ष्यों के अलावा फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और फिंगर प्रिंट को अनुसंधान की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया गया है. इसका प्रयोग आईओ को काफी हद तक अपराधी तक पहुंचने में सहायक सिद्ध हो रहा है.
