NewsWave EXCLUSIVE: जेपीएससी परीक्षा विवाद- पैसा कमाने की लालच में फंस गया, पूछताछ में पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते का बड़ा खुलासा, लेकिन डील के नहीं मिले रुपये, दोस्तों ने चेयरमैन न बनने की दी थी सलाह

SAURAV SINGH Ranchi: जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुए कथित घोटाले की जांच कर रही CID की पूछताछ...

JPSC exam controversy – Former Chairman L. Khyangte makes a major revelation during questioning
JPSC exam controversy – Former Chairman L. Khyangte makes a major revelation during questioning

SAURAV SINGH

Ranchi: जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुए कथित घोटाले की जांच कर रही CID की पूछताछ के दौरान पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. जानकारी के अनुसार सीआईडी के सवालों का सामना करते हुए पूर्व चेयरमैन ने स्वीकार किया कि वे पैसे कमाने की लालच में आकर फंस गए, हालांकि उन्होंने कंपनी से सीधे पैसे लेने की बात से इंकार किया है.

ब्लैकलिस्टेड कंपनी और OMR शीट पर सफाई

सीआईडी द्वारा पूछे गए सवालों पर पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परीक्षा आयोजित कराने के लिए जिस टीडीपीएल कंपनी का चयन किया गया था, उसके ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी उन्हें नहीं थी. उन्होंने किसी भी परीक्षार्थी को फर्जी तरीके से पास कराने या OMR शीट और ओएस में किसी प्रकार की गड़बड़ी कर लाभ पहुंचाने के आरोपों को खारिज किया.

दोस्तों ने JPSC चेयरमैन न बनने की सलाह दी थी

पूछताछ के दौरान पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते के मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद दोस्तों ने जेपीएससी चेयरमैन न बनने की सलाह दी थी,  ताकि बेवजह विवादों में न फंसें, लेकिन वे स्वयं इस पद पर आना चाहते थे.

दो करोड़ की डील और कमीशन का मामला

सीआईडी की जांच में टीडीपीएल कंपनी के निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से हुई पूछताछ के आधार पर मामला और गहरा गया है. टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह ने पूर्व में सीआईडी को बताया था कि परीक्षा का काम लेने के लिए चेयरमैन के साथ दो करोड़ रुपये की डील हुई थी. इसके अलावा प्रत्येक परीक्षा के बदले 20 प्रतिशत कमीशन और मुख्य सचिव के आवास पर कार्यरत धर्मेंद्र को 20 से 25 लाख रुपये का भुगतान तय हुआ था. पूछताछ में अभय तिवारी ने भी स्वीकार किया था कि दो करोड़ रुपये की यह डील धर्मेंद्र के माध्यम से ही तय की गई थी.

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CID की आगे की कार्रवाई और मनी ट्रेल

CID की टीम ने TDPL निदेशक रामबीर सिंह, सत्यपाल, अभय तिवारी, जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और धर्मेंद्र से इस वित्तीय लेन-देन के संबंध में गहन पूछताछ की है. जांच के दौरान सीआईडी को मनी ट्रेल से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं, जिनके भौतिक सत्यापन के लिए सीआईडी अधिकारी बैंकों से पत्राचार कर ठोस साक्ष्य जुटा रहे हैं.

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