नगर निगम में टैक्स कलेक्शन बंद, सुनसान पड़े कलेक्शन काउंटर! 2500 कर्मचारियों का रोजगार भी अटका

Ranchi: झारखंड के नगर निकायों में आज से टैक्स वसूली की पूरी व्यवस्था बदलने जा रही है. प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज...

नगर निगम में टैक्स कलेक्शन बंद

Ranchi: झारखंड के नगर निकायों में आज से टैक्स वसूली की पूरी व्यवस्था बदलने जा रही है. प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस फीस वसूलने वाली श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनर्स, रितिका और स्पैरो एजेंसियों का करार सूडा ने खत्म कर दिया है. नई एजेंसी का चयन अभी हुआ भी नहीं है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नई व्यवस्था तैयार नहीं थी तो पुरानी व्यवस्था अचानक क्यों बंद कर दी गई?सूडा निदेशक सूरज कुमार ने एजेंसियों का एग्रीमेंट रद्द करते हुए टैक्स वसूली की जिम्मेदारी सीधे नगर निकायों को देने का आदेश जारी किया है.

एक झटके में ढाई हजार लोगों के सामने रोजगार का संकट

इन एजेंसियों के जरिए करीब 2500 कर्मचारी टैक्स कलेक्शन का काम कर रहे थे. ये कर्मचारी वर्षों से अपने-अपने इलाकों में काम कर रहे थे और उन्हें क्षेत्र की संपत्तियों, मकानों और दुकानों की जानकारी थी. एजेंसी हटते ही इनके रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है.नई व्यवस्था में नगर निकायों को फिर से कई इलाकों का सर्वे और संपत्तियों की मैपिंग करनी पड़ सकती है. इससे राजस्व वसूली की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका है.

नगर निकायों की कमाई रुकी तो केंद्र की राशि पर भी असर

नगर निकायों की आर्थिक व्यवस्था में प्रॉपर्टी टैक्स, पानी का शुल्क और ट्रेड लाइसेंस से मिलने वाला राजस्व बेहद अहम है. वसूली कमजोर हुई तो निकायों की अपनी आय घट सकती है. इसका असर केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर भी पड़ सकता है.रांची नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती 115 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स वसूली का लक्ष्य बनाए रखना है. निगम अधिकारियों को आशंका है कि राजस्व संग्रह प्रभावित होने पर 15वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि पर भी असर पड़ सकता है.

अब घर बैठे टैक्स वसूली पर भी ब्रेक?

आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारी कई इलाकों में लोगों के घर पहुंचकर होल्डिंग टैक्स और वाटर यूजर चार्ज जमा करते थे. दुकानों में जाकर ट्रेड लाइसेंस बनाना, रिन्यू करना और शुल्क लेना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा था.एजेंसियां हटने के बाद लोगों को टैक्स और लाइसेंस से जुड़े काम के लिए नगर निगम कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ सकता है. ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था को लेकर भी तस्वीर साफ नहीं है. सवाल यह है कि एजेंसियों का करार खत्म होने के बाद संबंधित पोर्टल और सर्वर पहले की तरह काम करेंगे या नहीं.

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नई एजेंसी नहीं, फिर पुरानी क्यों हटाई?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नई टैक्स कलेक्शन एजेंसी का चयन अभी तक नहीं हुआ है और पुरानी एजेंसियों को नई एजेंसी आने तक काम करने का एक्सटेंशन दिया गया था, तो अचानक उनका करार क्यों खत्म किया गया?अब नगर निकायों के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ जनता को टैक्स भुगतान की सुविधा देना और दूसरी तरफ अपनी आय का लक्ष्य पूरा करना.

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