विनीत आभा उपाध्याय

Ranchi: जमशेदपुर के सोनारी आस्था हाई टेक सिटी की बहुचर्चित ज्योति अग्रवाल उर्फ स्वीटी हत्याकांड के मुख्य आरोपी और प्लाई कारोबारी रवि अग्रवाल को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है. झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद रवि अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया है.
हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता है
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता है. हालांकि मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए सर्वोच्च अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई (ट्रायल) में तेजी लाई जाए और प्रक्रिया को आज से छह महीने के भीतर पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जाए. शीर्ष अदालत ने रवि अग्रवाल को एक शर्त के साथ छूट दी है. अगर तय छह महीने की अवधि में ट्रायल पूरा नहीं हो पाता है तो रवि अग्रवाल को दोबारा जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता होगी. हालांकि यह छूट केवल तभी लागू होगी जब आरोपी रवि अग्रवाल सुनवाई की प्रक्रिया में पूरी तरह से सहयोग करेगा और किसी भी तरह से ट्रायल में देरी नहीं होने देगा.
जाने कैसे कराई पत्नी का हत्या
आरोपों के मुताबिक, रवि अग्रवाल अपनी पत्नी से तंग आ चुका था और उसकी हत्या की फिराक में था. उसने पूर्व चालक मुकेश मिश्रा के जरिए जमशेदपुर के चार शूटरों से सौदा किया और पहली बार आठ लाख रुपये की सुपारी दी गई, लेकिन काम न होने पर सात लाख रुपये वापस ले लिए गए. इसके बाद दूसरी बार 16 लाख रुपये में हत्या की सुपारी तय हुई. रवि ने पहले बिष्टुपुर के एक रेस्टोरेंट में ज्योति की गला रेतकर हत्या कराने की योजना बनाई थी, ताकि वह निर्दोष साबित हो सके, लेकिन शूटर वहां नहीं पहुंचे. फिर कपाली के डोबो में भी साजिश नाकाम रही वारदात वाली रात वह पत्नी और दोनों बेटों को मिनी पंजाब होटल खाना खिलाने ले गया. लौटते समय रास्ते में उल्टी का बहाना बनाकर सुनसान जगहों पर गाड़ी रोककर शूटरों का इंतजार किया, जहां शूटरों ने ज्योति की हत्या कर दी. पुलिस ने रवि, चालक मुकेश और चारों शूटरों को प्रयुक्त हथियार और बाइक के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. सभी आरोपी जेल में बंद हैं.

