Ranchi: राज्य के करीब 1800 सहायक पुलिसकर्मियों के अनुबंध को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सहायक पुलिसकर्मियों के अवधि विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं होने से उनमें नाराजगी है. झारखंड सहायक पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए सरकार से सवाल किया है कि आखिर उनका भविष्य क्या होगा और सरकार इस पर स्थिति स्पष्ट करे. सहायक पुलिसकर्मियों का कहना है कि वर्ष 2017 में उनकी बहाली हुई थी और अब सेवा करते हुए करीब नौ साल बीत चुके हैं. ऐसे में उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक क्षमता में भी बदलाव आया है. यदि अब अनुबंध समाप्त किया जाता है तो उनके लिए दूसरी नौकरी की तैयारी करना भी मुश्किल होगा.

12 नक्सल प्रभावित जिलों में हुई थी बहाली
वर्ष 2017 में पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा, चतरा, पलामू, गढ़वा, दुमका, लातेहार, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर और गिरिडीह समेत 12 नक्सल प्रभावित जिलों में सहायक पुलिसकर्मियों की बहाली की गई थी. सहायक पुलिसकर्मियों को अपने अनुबंध की अवधि बढ़ाने के लिए लगातार सरकार से गुहार लगानी पड़ती है. झारखंड सहायक पुलिस प्रदेश एसोसिएशन के सचिव विवेकानंद गुप्ता ने कहा कि जिला बल के जवानों की तरह उनसे 24 घंटे ड्यूटी ली जाती है, लेकिन वेतन और भत्ते काफी कम हैं.
जिला पुलिस के जवानों की तरह ली जाती है ड्यूटी
सहायक पुलिसकर्मियों के अनुसार उन्हें करीब 13 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है. इसके बावजूद LRP, गश्त और कार्यालय के काम में लगाया जाता है. पर्व-त्योहार के दौरान ट्रैफिक ड्यूटी भी कराई जाती है. उनका कहना है कि काम जिला बल के जवानों की तरह लिया जाता है, लेकिन सुविधाएं और वेतन उस अनुपात में नहीं हैं.
छत्तीसगढ़ की तर्ज पर स्थायी करने की मांग
सहायक पुलिसकर्मी सरकार से उन्हें छत्तीसगढ़ की तर्ज पर स्थायी करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि झारखंड और छत्तीसगढ़ का गठन एक ही समय में हुआ था, लेकिन छत्तीसगढ़ में डिस्ट्रिक्ट स्ट्राइक फोर्स संवर्ग गठित कर सहायक आरक्षकों को स्थायी किया गया है. उन्होंने मांग की है कि झारखंड में भी सहायक पुलिसकर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करते हुए स्थायी नियुक्ति की दिशा में कदम उठाया जाए. साथ ही वेतन और अन्य सुविधाओं में भी सुधार किया जाए. कैबिनेट बैठक में अवधि विस्तार पर चर्चा नहीं होने के बाद अब सहायक पुलिसकर्मियों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है.

