Ranchi: रांची समेत झारखंड के सभी नगर निकायों में प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस फीस की वसूली की व्यवस्था बदल गई. अब टैक्स कलेक्शन एजेंसियों के कर्मचारी घर-घर जाकर टैक्स जमा नहीं करेंगे. राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने राजस्व संग्रह का काम कर रही श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनर्स, रितिका और स्पैरो के साथ एग्रीमेंट खत्म कर दिया है. नई एजेंसी का चयन किए बिना पुरानी एजेंसियों को हटाने से नगर निकायों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

सूडा निदेशक ने जारी किया एग्रीमेंट रद्द करने का आदेश
सूडा निदेशक सूरज कुमार ने एजेंसियों के साथ एग्रीमेंट रद्द करने का आदेश जारी किया है. इन एजेंसियों का मूल करार पहले ही समाप्त हो चुका था, लेकिन नई एजेंसी के चयन तक उन्हें काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी. अब यह व्यवस्था भी खत्म कर दी गई है. फिलहाल टैक्स वसूली का काम संबंधित नगर निकायों को खुद करना होगा.
घर बैठे टैक्स वसूली बंद, लोगों को नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ेंगे
नई एजेंसी का चयन नहीं होने तक सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को होगी. पहले टैक्स कलेक्टर अपने-अपने क्षेत्र में जाकर घर और प्रतिष्ठानों से प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस की फीस जमा करते थे. अब लोगों को इन कामों के लिए नगर निगम या संबंधित नगर निकाय के कार्यालय का रुख करना पड़ सकता है.
इससे खासकर बुजुर्गों, व्यवसायियों और उन लोगों की परेशानी बढ़ सकती है, जो घर बैठे टैक्स जमा करने की व्यवस्था पर निर्भर थे. टैक्स कलेक्टरों को अपने क्षेत्र की प्रॉपर्टी, उसका क्षेत्रफल और पिछली टैक्स जानकारी तक की जानकारी रहती थी. नई व्यवस्था में यह पूरा सिस्टम प्रभावित होगा.
2500 टैक्स कलेक्टरों पर भी संकट
एजेंसियों के हटने से करीब 2500 टैक्स कलेक्टरों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो गया है. ये कर्मचारी लंबे समय से अलग-अलग क्षेत्रों में राजस्व संग्रह का काम कर रहे थे. इनके हटने के बाद नगर निकायों को न केवल टैक्स वसूली की नई व्यवस्था बनानी होगी, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी की जानकारी को भी नए सिरे से व्यवस्थित करना पड़ सकता है.
115 करोड़ का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो रांची को झटका
रांची नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चिंता राजस्व संग्रह को लेकर है. निगम के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 115 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स कलेक्शन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है. यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, तो 15वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि पर असर पड़ सकता है.
नगर निकायों की अपनी आय और राजस्व क्षमता केंद्र से मिलने वाले वित्तीय संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है. ऐसे में टैक्स वसूली की व्यवस्था लंबे समय तक बाधित रही, तो रांची नगर निगम की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ने के साथ केंद्र से मिलने वाले फंड पर भी संकट की आशंका है.
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