हजारीबाग: 10 साल से हाईस्कूल शिक्षक का इंतजार, बच्चों की पढ़ाई प्राथमिक शिक्षकों के भरोसे – News Wave Jharkhand

Hazaribagh : पदमा प्रखंड के मध्य विद्यालय केवला को उत्क्रमित उच्च विद्यालय बने 10 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन विद्यालय में अब...

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Hazaribagh : पदमा प्रखंड के मध्य विद्यालय केवला को उत्क्रमित उच्च विद्यालय बने 10 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन विद्यालय में अब तक हाईस्कूल स्तर के एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है. शिक्षक के अभाव में कक्षा नौवीं और दसवीं के करीब 55 विद्यार्थियों की पढ़ाई प्राथमिक शिक्षकों के भरोसे चल रही है. गणित, विज्ञान समेत कई महत्वपूर्ण विषयों की नियमित पढ़ाई नहीं होने से विद्यार्थियों को मैट्रिक परीक्षा की तैयारी खुद के भरोसे करनी पड़ रही है.

शुरुआत में सौ से अधिक बच्चों ने लिया था नामांकन

वर्ष 2016 में मध्य विद्यालय केवला को उत्क्रमित कर उच्च विद्यालय बनाया गया था. विद्यालय के आसपास के बरदेवा, पिंडारकोण, भंडरा, सिमरकुरहा, नचनबे, गारूकुरहा, कलर, गोतिया और कोनिया समेत करीब एक दर्जन गांवों के बच्चों और अभिभावकों में खुशी थी. शुरुआत में उच्च कक्षाओं में सौ से अधिक विद्यार्थियों ने नामांकन कराया था. उस समय जल्द ही हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति का आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक दशक बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.

शिक्षक नहीं, इसलिए घटता गया नामांकन

हाईस्कूल स्तर के शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने का सीधा असर विद्यार्थियों के नामांकन पर पड़ा है. वर्तमान में कक्षा नौवीं और दसवीं में करीब 55 विद्यार्थी ही नामांकित हैं. अभिभावकों का कहना है कि पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण आसपास के बच्चे अब केवला स्कूल में नामांकन लेने से बच रहे हैं. कई विद्यार्थी मजबूरन पांच से सात किलोमीटर दूर सरैया और पदमा उच्च विद्यालय में नामांकन करा रहे हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है.

प्राथमिक शिक्षकों के भरोसे हाईस्कूल की पढ़ाई

विद्यालय के प्रभारी शिक्षक के अनुसार उपलब्ध संसाधनों और शिक्षकों के माध्यम से जितना संभव हो पाता है, विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है. लेकिन हाईस्कूल स्तर के विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं होने के कारण गणित, विज्ञान समेत अन्य विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. इसका असर विद्यार्थियों की मैट्रिक परीक्षा की तैयारी और परिणाम पर भी पड़ रहा है. हाईस्कूल शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर विद्यालय के प्रभारी शिक्षकों ने कई बार शिक्षा विभाग और जिले के वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा है. विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों ने भी पिछले 10 वर्षों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समक्ष समस्या रखी है. इसके बावजूद अब तक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है.

अभिभावकों में नाराजगी, भविष्य को लेकर चिंता

अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय को हाईस्कूल में उत्क्रमित करने के बाद उम्मीद जगी थी कि गांव के बच्चों को घर के पास ही बेहतर शिक्षा मिलेगी. लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है. ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से अविलंब हाईस्कूल स्तर के शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और उन्हें दूसरे विद्यालयों में जाने के लिए मजबूर न होना पड़े.

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