रांची: आज यानी विश्व जल दिवस (22 मार्च) के मौके पर जहां जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की बात की जा रही है, वहीं झारखंड में हालात चिंताजनक बने हुए हैं. राज्य में अब तक करीब 33 फीसदी भूजल का दोहन हो चुका है.

शहरी इलाकों में पानी की कमी
राज्य के शहरी क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता जरूरत के मुकाबले काफी कम है. जहां 1616.35 लाख गैलन पानी की जरूरत है, वहीं सिर्फ 734.35 लाख गैलन पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है.
भूजल दोहन वाले संवेदनशील इलाके
भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कई इलाके अत्यधिक दोहन की श्रेणी में पहुंच चुके हैं. इनमें बोकारो का बेरमो, धनबाद का शहरी क्षेत्र, पूर्वी सिंहभूम का गोलमुरी और जुगसलाई, जमशेदपुर शहरी क्षेत्र और रामगढ़ का चितरपुर शामिल हैं.
क्रिटिकल श्रेणी में धनबाद के टुंडी और तोपचांची, कोडरमा का जयनगर, रामगढ़, रांची शहरी क्षेत्र और सिल्ली शामिल हैं. वहीं सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में देवघर, धनबाद, गढ़वा, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, खलारी और ओरमांझी जैसे इलाके शामिल हैं.
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राज्य में जल उपलब्धता की स्थिति
- भूजल उपलब्धता: 4292 मीट्रिक क्यूबिक मीटर
- सतही जल: 25876.98 मीट्रिक क्यूबिक मीटर
पानी की खपत का बंटवारा
- सिंचाई के लिए: 3813.17 मीट्रिक क्यूबिक मीटर
- उद्योग के लिए: 4338 मीट्रिक क्यूबिक मीटर
- शहरी क्षेत्रों में जरूरत: 1616.35 लाख गैलन
- उपलब्धता: 734.35 लाख गैलन
तेजी से बढ़ रहा भूजल दोहन

- 2024 में भूजल रिचार्ज: 6.28 BCM
- 2025 में भूजल रिचार्ज: 6.15 BCM
- 2024 में निकासी: 1.81 BCM
- 2025 में निकासी: 1.85 BCM
- 2024 में दोहन स्तर: 31.43 फीसदी
- 2025 में दोहन स्तर: 32.89 फीसदी
