विनीत आभा उपाध्याय
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के बिजली उपभोक्ताओं और उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF) के कामकाज को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है,कि CGRF में नए सदस्यों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करने से पहले विभाग को निवर्तमान सदस्यों के कार्यकाल विस्तार की संभावनाओं पर विचार करना होगा. अदालत के इस फैसले से उन विशेषज्ञों और सदस्यों को बड़ी राहत मिली है जो वर्षों से इन निकायों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. यह पूरा मामला झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) द्वारा जारी किए गए एक नए भर्ती विज्ञापन के बाद शुरू हुआ. राज्य के विभिन्न CGRF निकायों में कार्यरत कई सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने वाला था. दरअसल विभाग ने इन सदस्यों के कार्य प्रदर्शन की समीक्षा करने या उन्हें विस्तार देने के बजाए रिक्तियों को भरने के लिए सीधे नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी और आवेदन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी.जिसके बाद मौजूदा सदस्यों ने इस प्रक्रिया को झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) नियमावली के खिलाफ बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की. याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई कि अगर किसी सदस्य का आचरण और कार्य संतोषजनक है तो नियमानुसार उसे कार्यकाल विस्तार का पहला अधिकार मिलना चाहिए. अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मौजूदा सदस्यों के कार्यकाल विस्तार पर विचार करना केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया है. विभाग सीधे नई भर्ती की ओर तब तक नहीं बढ़ सकता जब तक वह मौजूदा सदस्यों की पात्रता को तर्कसंगत आधार पर खारिज न कर दे. अदालत ने माना कि CGRF एक अर्ध-न्यायिक निकाय है. यहाँ तकनीकी और कानूनी बारीकियों को समझने के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है.अनुभवी सदस्यों को बिना किसी ठोस कारण के हटाकर नए लोगों को लाना उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ हो सकता है.


