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राहत : 2 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट को किया सुरक्षित पार, ईरान के लारक और केश्म द्वीपों के बीच देखे गए जहाज

Delhi : ऊर्जा परेशानियों के बीच भारत के लिए राहत की खबर है. शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, दो भारतीय ध्वज वाले...

Delhi : ऊर्जा परेशानियों के बीच भारत के लिए राहत की खबर है. शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत ने होर्मुज को सुरक्षित पार कर लिया है. सोमवार दोपहर ये दोनों जहाज ईरान के लारक और केश्म द्वीपों के बीच देखे गए, जहां वे संभवतः ईरानी अधिकारियों को अपनी पहचान स्पष्ट कर रहे थे. ये दोनों जहाज उन 22 भारतीय जहाजों में शामिल थे, जो पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण लगभग बंद हो चुके होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए थे. यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और खाड़ी देशों से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है.

भारत पहुंच चुका है शिवालिक और नंदा देवी जहाज

इससे पहले भी भारत के कुछ जहाज सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं. एलपीजी टैंकर एमटी शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा, जबकि एमटी नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंची. दोनों जहाज करीब 92,712 टन एलपीजी लेकर आए थे, जो देश की लगभग एक दिन की घरेलू गैस खपत के बराबर है.

जग लाडकी तेल टैंकर भी पहुंच चुका है भारत

इसी क्रम में जग लाडकी नामक भारतीय तेल टैंकर, जो यूएई से 80,886 टन कच्चा तेल लेकर आ रहा था, 18 मार्च को मुंद्रा पहुंच गया. वहीं जग प्रकाश नामक टैंकर ओमान से पेट्रोल लेकर अफ्रीका के लिए सुरक्षित रूप से हॉर्मुज पार कर चुका है और तंजानिया की ओर बढ़ रहा है.

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भारत के कई जहाज फंसे हुए

युद्ध की शुरुआत में कुल 28 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में मौजूद थे, जिनमें 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से और चार पूर्वी हिस्से में थे. बीते दिनों दोनों ओर से दो-दो जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं, लेकिन अभी भी 24 में से 22 जहाज पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं, जिन पर 611 नाविक सवार हैं, जबकि दो जहाज पूर्वी हिस्से में हैं. फंसे हुए जहाजों में विविध प्रकार के पोत शामिल हैं छह एलपीजी टैंकर (जिनमें से दो अब रवाना हो चुके हैं), एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चा तेल टैंकर, एक केमिकल टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर, एक ड्रेजर, एक खाली जहाज और तीन जहाज ड्राई डॉक में मरम्मत के लिए हैं.

वैश्विक स्तर पर बनी हुई है गंभीर स्थिति

वैश्विक स्तर पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. करीब 500 टैंकर अभी भी पर्शियन (अरब) गल्फ में फंसे हुए हैं, जिनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 ऑयल प्रोडक्ट टैंकर, 104 केमिकल/प्रोडक्ट टैंकर, 52 केमिकल टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान कुछ जहाजों को सत्यापन प्रक्रिया के बाद ही हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दे रहा है. इसके तहत जहाजों की मालिकी, कार्गो और गंतव्य की जांच की जा रही है. कुछ जहाज लारक-केश्म चैनल के रास्ते हल्का मार्ग बदलकर भी निकल रहे हैं, जो इस सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है.

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हार्मुज जलडमरूमध्य बेहद अहम

भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद अहम है. देश अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी कच्चा तेल, 50 फीसदी प्राकृतिक गैस और 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है. युद्ध से पहले भारत के आधे से ज्यादा कच्चे तेल का आयात सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे खाड़ी देशों से होता था, जो इसी मार्ग पर निर्भर हैं. हालांकि कच्चे तेल की आपूर्ति को रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से कुछ हद तक संतुलित किया गया है, लेकिन गैस और एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसका असर औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर साफ दिख रहा है.

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