Simdega: आदिवासी बहुल जिला सिमडेगा में पवित्रता और आस्था का महापर्व चैती छठ बडी आस्था के साथ मनाया जा रहा है. चैती छठ के तीसरे दिन सिमडेगा की डीसी कंचन सिंह ने केलाघाघ सूर्य मंदिर सांझी घाट पर अन्य व्रतियों के साथ अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया. अर्घदान कर सभी व्रतियों ने अपने परिवार के साथ-साथ पूरे समाज की सुख-शांति की कामना की. केलाघाघ सरोवर तट पर सूर्य मंदिर के पुरोहित कल्याण मिश्र ने मंत्रोच्चारण किया. एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते… अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर… के साथ अर्घदान करवाया.
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भगवान सूर्य की उपासना
अर्घदान के पहले सभी व्रती जलाशय में उतर कर भगवान भास्कर से प्रार्थना करते रहे. हे अस्ताचलगामी सूर्यदेव, आपकी हर किरण पूरी धरा को ऊर्जावान बनाने में सक्षम है. बिना आपकी इजाजत धरती तो क्या सौर्यमंडल का कोई भी सदस्य हिल-डुल तक नहीं सकता. आप वक्र हो जाओ तो सात समुंदरों में तूफान आने लगते हैं, पहाड़ खंड-खंड होने लगते हैं. इसलिए हे आदि देव, हम सब आपकी प्रिय बहन छठ मैया के दिन आपसे कृपा की आकांक्षा लिए याचना करते हैं कि अपने सामर्थ्य का अंश मात्र हम सब पर भी बरसाओ प्रभु. हमारी आराधना स्वीकार करो.
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सूर्य की रोशनी सेहत के लिए फायदेमंद
अस्ताचलगामी और उदयीमान सूर्य को अर्घ अर्पित करते हैं तो जल की धारा को पार करती हुई सूर्य की सप्तरंगी किरणें हमारे सिर से पैर तक पड़ती हैं, जो शरीर के सभी भागों को प्रभावित करती हैं. इससे हमें स्वत: ही सूर्य किरणयुक्त जल-चिकित्सा का लाभ मिलता है. बौद्धिक शक्ति में लाभ के साथ नेत्रज्योति, ओज-तेज, निर्णयशक्ति और पाचनशक्ति में वृद्धि पायी जाती है, शरीर स्वस्थ रहता है. सूर्य प्रकाश के हरे, बैंगनी और अल्ट्रावायलेट भाग में जीवाणुओं को नष्ट करने की विशेष शक्ति है. प्रात:काल नियमित सूर्य नमस्कार करने से शरीर ह्ष्ट पुष्ट रहता है. सूर्य प्रकाश(धूप) में बैठकर कनेर, दुपहरिया, देवदारू, मैनसिल, केसर और छोटी इलायची मिश्रित जल से नियमित स्नान से पक्षाघात, क्षय, पोलियो, ह्रदय विकार, हड्डियों की कमजोरी आदि रोग में विशेष लाभ प्राप्त होता है.
