रांची: कोयला ढुलाई में रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई

रांची:प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल ऑफिस ने कोयला परिवहन में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की...

रांची:प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल ऑफिस ने कोयला परिवहन में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने 26 मार्च को सीसीएल के एक अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों सहित कुल चार आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल किया है.

ईडी ने इस मामले में जिन चार लोगों को मुख्य आरोपी बनाया है:

– संजीव कुमार सिंह: सहायक सुरक्षा उप-निरीक्षक, सीसीएल (तत्कालीन एरिया सुरक्षा प्रभारी, बरका सयाल क्षेत्र).

– पूनम देवी: संजीव कुमार सिंह की पत्नी.

– गोपाल कुमार: संजीव कुमार सिंह का छोटा भाई.

– राहुल कुमार: एक निजी कोयला ट्रांसपोर्टर.

क्या है पूरा मामला?

ईडी की जांच का आधार सीबीआई रांची द्वारा दर्ज की गई वह प्राथमिकी है, जिसमें संजीव कुमार सिंह पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था. सीबीआई ने 9 दिसंबर, 2025 को आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की थी. आरोप है कि जब संजीव कुमार सिंह बरका सयाल क्षेत्र में सुरक्षा प्रभारी के रूप में तैनात थे, तब उन्होंने कोयला खदानों से परिवहन करने वाले निजी ट्रांसपोर्टरों से अनुचित लाभ लेने के लिए अपनी आधिकारिक स्थिति का इस्तेमाल किया. ईडी की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं कि किस तरह अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने के लिए परिवार के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया.

अनुचित लाभ पाने के लिए संजीव कुमार सिंह को पांच लाख की रिश्वत दी:

निजी ट्रांसपोर्टर राहुल कुमार ने कोयला ढुलाई में अनुचित लाभ पाने के लिए संजीव कुमार सिंह को पांच लाख रुपया की रिश्वत दी. यह राशि सीधे उनकी पत्नी पूनम देवी के एक्सिस बैंक खाते में जमा कराई गई थी. जांच के दौरान पूनम देवी के खाते में 4.46 लाख की अतिरिक्त अघोषित नकद जमा राशि भी मिली, जिसका वह कोई वैध स्रोत नहीं बता सकीं।पूनम देवी ने अपने खाते को अपराध की कमाई के मुख्य ठिकाने के रूप में इस्तेमाल होने दिया. इसके बाद उन्होंने अवैध राशि में से चार लाख अपने देवर गोपाल कुमार के खाते में ट्रांसफर कर दिए. गोपाल कुमार ने पैसे मिलते ही महज सात दिनों के भीतर उसे खर्च कर दिया. उन्होंने नकद निकासी की, अपने दोस्तों को पैसे ट्रांसफर किए और अपने वाहन की किस्त भरी, ताकि अवैध पैसे को निजी संपत्तियों में मिलाया जा सके.

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