Click Here
Click Here
Click Here

झारखंड में 300 वर्गमीटर के दायरे में बने अवैध भवन अब होंगे वैध, पोर्टल लॉन्च

Ranchi: झारखंड के शहरी क्षेत्रों में बिना नक्शा पास कराए या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत भवन बनाने वाले लाखों लोगों के लिए...

Ranchi: झारखंड के शहरी क्षेत्रों में बिना नक्शा पास कराए या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत भवन बनाने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. राज्य सरकार ने ‘अनाधिकृत भवन नियमितीकरण योजना’ को नई रफ्तार देते हुए इसके लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत कर दी है. नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार द्वारा लॉन्च किया गया यह पोर्टल भ्रष्टाचार और लेटलतीफी के पुराने ढर्रे को खत्म कर पारदर्शिता के नए युग की शुरुआत करेगा. अब आवेदन से लेकर स्वीकृति और शुल्क भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया केवल एक क्लिक की दूरी पर होगी.

बिचौलियों का खेल खत्म, सीधे सरकार से संपर्क

इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा प्रहार उन बिचौलियों पर होगा जो नियमितीकरण के नाम पर आम जनता को गुमराह करते थे. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया को ‘एंड-टू-एंड’ डिजिटल बनाया गया है. भवन मालिक अब सीधे पोर्टल पर लॉगिन कर अपनी फाइल ट्रैक कर सकेंगे, जिससे उन्हें सरकारी दफ्तरों की धूल नहीं फांकनी पड़ेगी.

किसे मिलेगा फायदा

  • क्षेत्रफल की सीमा: केवल वे ही भवन नियमित हो सकेंगे जो अधिकतम 300 वर्ग मीटर के दायरे में निर्मित हैं.
  • ऊंचाई का मानक: सुरक्षा और नियमों को ध्यान में रखते हुए, जी प्लस टू (G+2) से ऊंचे भवनों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा.
  • दस्तावेजीकरण: आवेदन के साथ भवन का वर्तमान नक्शा, जमीन के कागजात और अन्य आवश्यक विवरण अपलोड करना अनिवार्य होगा.

कैसे काम करेगी डिजिटल व्यवस्था?

  1. ऑनलाइन आवेदन: आवेदक पोर्टल पर पंजीकरण कर अपने दस्तावेज अपलोड करेंगे.
  2.  डिजिटल स्क्रूटनी: विभागीय स्तर पर दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच की जाएगी.
  3. स्थल निरीक्षण: सत्यापन के बाद अधिकारी मौके पर जाकर भवन की स्थिति और नियमों के उल्लंघन की प्रकृति का आंकलन करेंगे.
  4. शुल्क निर्धारण: उल्लंघन के आधार पर पोर्टल स्वतः ही देय शुल्क की गणना करेगा, जिसे ऑनलाइन ही जमा करना होगा.
  5. डिजिटल सर्टिफिकेट: सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने पर ऑनलाइन ही स्वीकृति पत्र जारी कर दिया जाएगा.

विभाग की चेतावनी: नए अवैध निर्माण पर छूट नहीं

मंत्री सुदिव्य कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि इस योजना का उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है जिनके भवन अनजाने में या पुराने नियमों की पेचीदगियों के कारण अवैध रह गए थे. विभाग ने सख्त चेतावनी दी है कि इसे भविष्य में होने वाले अवैध निर्माणों के लिए ‘लाइसेंस’ न समझा जाए. यह योजना केवल पूर्व निर्मित भवनों को कानूनी दायरे में लाकर शहरों को सुव्यवस्थित करने की एक कोशिश है.

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *