NTPC खनन परियोजना पर फूटा जनाक्रोश: सड़क हादसों में 1500 से अधिक मौतें, उप प्रमुख अमेरिका महतो ने उठाया बड़ा सवाल

रांची: केरेडारी (हजारीबाग) बड़कागांव क्षेत्र में NTPC की खनन परियोजना को शुरू हुए एक दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन...

रांची: केरेडारी (हजारीबाग) बड़कागांव क्षेत्र में NTPC की खनन परियोजना को शुरू हुए एक दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी स्थानीय जनता को स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, प्रदूषण नियंत्रण और सुरक्षित परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं. ऐसे में अब परियोजना के खिलाफ क्षेत्र में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है.

केरेडारी उप प्रमुख अमेरिका महतो ने NTPC (NML) और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे विकास के नाम पर स्थानीय जनता के जीवन, सुरक्षा और भविष्य से समझौता बताया है. उन्होंने कहा कि NTPC की खनन परियोजना ने बड़कागांव, केरेडारी और टंडवा क्षेत्र की जमीन, संसाधन और जनजीवन को गहराई से प्रभावित किया है, लेकिन इसके बदले स्थानीय लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला.

कंपनी के बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि क्षेत्र में आज भी बेहतर अस्पताल, गुणवत्तापूर्ण स्कूल, सुरक्षित सड़क, स्वच्छ पेयजल और प्रदूषण नियंत्रण की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है.

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सड़क हादसे सबसे बड़ा मुद्दा, हजारों परिवार प्रभावित

उप प्रमुख अमेरिका महतो ने सबसे गंभीर मुद्दा सड़क सुरक्षा को बताया. उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में NTPC परियोजना से जुड़े खनन कार्य और भारी वाहनों के दबाव के कारण हजारीबाग और चतरा जिले में सड़क दुर्घटनाओं में 1500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि उन परिवारों का दर्द है जिन्होंने अपने कमाऊ सदस्य—बेटे, पिता, भाई—को खो दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला ढुलाई और खनन परिवहन ने क्षेत्र की सड़कों को बेहद खतरनाक बना दिया है, लेकिन कंपनी और प्रशासन ने आम जनता की सुरक्षा को कभी प्राथमिकता नहीं दी.

विकास मॉडल पर पुनर्विचार जरूरी

अमेरिका महतो ने कहा कि यदि विकास के नाम पर लोग अपनी जान गंवाते रहें, बच्चे असुरक्षित रास्तों से स्कूल जाएं, गांवों में धूल और प्रदूषण फैले, किसान अपनी जमीन खो दें और बदले में न रोजगार मिले, न सुरक्षा और न सम्मानजनक पुनर्वास, तो ऐसे विकास मॉडल पर गंभीर पुनर्विचार की जरूरत है. उन्होंने NTPC और जिला प्रशासन से मांग की कि किसी भी नए भूमि अधिग्रहण से पहले क्षेत्र की जनता को बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा की ठोस गारंटी दी जाए.

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