रांची: भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पवित्र जन्मस्थली उलिहातु की पुनः यात्रा कर वे अत्यंत भावविभोर हैं. उन्होंने इस महान स्वतंत्रता सेनानी को अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनका जीवन और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा.

उन्होंने कहा कि उन्हें झारखंड के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण करने का वह दिन भलीभांति याद है, जब उन्होंने पहली बार उलिहातु की यात्रा की थी, जो उनके लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुभव रहा.
जनजातीय गौरव दिवस से बढ़ी जागरूकता
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2021 में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का लिया गया निर्णय आदिवासी विरासत के प्रति राष्ट्रीय जागरूकता और गौरव को बढ़ाने वाला है.
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खूंटी में प्रधानमंत्री के साथ उपस्थित होने का अवसर मिला, जब पीएम-जनमन योजना की घोषणा की गई. यह योजना विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समुदायों की सुरक्षा और सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई एक परिवर्तनकारी पहल है.
उन्होंने कहा कि आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की समृद्ध विरासत और संघर्षों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अमृत काल में आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने का यह प्रयास उन अधिकारों और गरिमा की प्राप्ति का प्रतीक है, जिनके लिए भगवान बिरसा मुंडा ने संघर्ष किया था.
स्थानीय लोगों से की मुलाकात
उपराष्ट्रपति ने बिरसा मुंडा के वंशजों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की. इस दौरान लोगों ने पारंपरिक तरीके से “जोहार” कहकर उनका स्वागत किया, जिससे कार्यक्रम और भी खास बन गया.
उपराष्ट्रपति के आगमन को लेकर उलिहातु और आसपास के गांवों में खासा उत्साह देखने को मिला. लोग सुबह से ही उनके स्वागत के लिए जुटे रहे. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित नजर आए.
उपराष्ट्रपति का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि झारखंड के गौरव और इतिहास से जुड़ने का एक विशेष अवसर बन गया. बिरसा मुंडा की धरती पर पहुंचकर उन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज के योगदान को भी सम्मान दिया.
