Ranchi: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) 2026 के तहत राज्य सरकार ने जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की जिलावार सूची जारी कर दी है. दरअसल स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जेटेट नियमावली-2026 को अधिसूचित कर दिया है. इसे सरकारी गजट में बीते 26 मार्च को प्रकाशित किया गया है. नियमावली में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को लाने की व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देना और प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा के उपयोग को मजबूत करना है.

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रांची में कुडुख (उरांव), मुंडारी (मुंडा), खड़िया और भूमिज सहित क्षेत्रीय भाषा शामिल
जारी सूची के अनुसार राज्य के सभी 24 जिलों में वहां प्रचलित जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल किया गया है. राजधानी रांची में कुडुख (उरांव), मुंडारी (मुंडा), खड़िया और भूमिज जैसी जनजातीय भाषाओं के साथ नागपुरी, पंचपरगनिया, कुरमाली और बांग्ला को क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी गई है. इसी प्रकार लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पलामू और गढ़वा जैसे जिलों में मुख्य रूप से कुडुख और नागपुरी भाषा को प्रमुखता दी गई है. सिंहभूम क्षेत्र के जिलों जैसे पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला और खरसावां में संथाली, हो, मुंडारी और भूमिज जैसी जनजातीय भाषाओं को शामिल किया गया है, जबकि क्षेत्रीय भाषाओं में कुरमाली, उड़िया और बांग्ला को स्थान मिला है। संथाल परगना के जिलों यथा- दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा में संथाली प्रमुख जनजातीय भाषा है, वहीं खोरठा और बांग्ला को क्षेत्रीय भाषा के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

उत्तरी छोटानागपुर जिलों में संथाली और कुड़ुख के साथ नागपुरी, खोरठा और कुरमाली को मान्यता
उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के हजारीबाग, कोडरमा, चतरा और बोकारो जिलों में संथाली और कुड़ुख के साथ नागपुरी, खोरठा और कुरमाली को मान्यता दी गई है. इसी क्रम में धनबाद, गिरिडीह और देवघर में भी संथाली के साथ खोरठा और कुरमाली प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में शामिल हैं. रामगढ़ जिले में संथाली और कुड़ुख के साथ नागपुरी, कुरमाली और खोरठा को सूची में जगह मिली है. खूंटी जिले में कुड़ुख, खड़िया और मुंडारी को जनजातीय भाषा तथा नागपुरी, पंचपरगनिया और कुरमाली को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल किया गया है.
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बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने में की हुई पहल
विभाग का कहना है कि इस पहल से स्थानीय युवाओं को शिक्षक भर्ती में अवसर मिलेगा और बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने में सुविधा होगी. शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा से बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होती है. यह निर्णय नई शिक्षा नीति के अनुरूप भी माना जा रहा है, जिसमें प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में पढ़ाई पर जोर दिया गया है.
