रांची: झारखंड के आपराधिक गलियारों में इन दिनों एक अजीबोगरीब और खतरनाक बदलाव देखने को मिल रहा है. अपराधी अब वारदातों को अंजाम देने के बाद छिपने के बजाय सोशल मीडिया पर सरेआम उसकी जिम्मेदारी ले रहे हैं. पोस्ट कर गिरोह न केवल अपना दबदबा कायम कर रहे हैं, बल्कि आम जनता के बीच दहशत फैलाने का इसे सबसे बड़ा हथियार बना लिया है
हालांकि, अपराधियों की यह डिजिटल बहादुरी पुलिस के लिए एक मददगार सुराग भी साबित हो रही है, जिससे जांच की दिशा तय करना आसान हो गया है.
दहशत का वायरल खेल, हालिया घटनाओं पर एक नजर
– 29 मार्च 2026: रामगढ़ के पतरातु में फ्लाईओवर साइट पर अपराधियों ने फायरिंग की जिसमें एक व्यक्ति को गोली लगी, इस घटना का जिम्मा राहुल दुबे गैंग ने लिया.
– 09 जनवरी 2026: चतरा जिले राजधर साइडिंग के पास हुई गोलीबारी की ज़िम्मेदारी राहुल सिंह गिरोह ने ली थी.
– 06 जनवरी 2026: रामगढ़ के कुजू में कोयला व्यवसायी डब्बू सिंह के आवास पर हुई गोलीबारी की ज़िम्मेदारी राहुल दुबे गैंग ने पर्चा छोड़कर ली थी.
– 03 जनवरी 2026: रामगढ़ ओवर ब्रिज निर्माण कार्य के ऑफिस में हुई गोलीबारी का जिम्मा भी राहुल सिंह गिरोह ने ली.
– 30 दिसंबर 2025: हजारीबाग के उरीमारी में फायरिंग की ज़िम्मेदारी राहुल दुबे गैंग ने ली थी.
– 24 दिसंबर, 2025: हजारीबाग के उरीमारी वारदात की ज़िम्मेदारी भी राहुल दुबे गैंग ने ली.
अमन साव से शुरू हुआ सोशल मीडिया पर पोस्ट और आतंक का सिलसिला
झारखंड में अपराध के डिजिटलीकरण की शुरुआत कुख्यात अपराधी अमन साव (अब मृत) ने की थी. अमन साव ने पहली बार हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट करनी शुरू कीं और घटनाओं की जिम्मेदारी लेकर अपने नाम का खौफ पैदा किया. इसी का अनुसरण करते हुए अब प्रिंस खान, राहुल दुबे और राहुल सिंह जैसे अपराधी अत्याधुनिक हथियारों के साथ फोटो डालते हैं और वारदात के चंद घंटों के भीतर पोस्ट लिखकर अपना वर्चस्व’ जताते हैं.
पुलिस के लिए दोहरी चुनौती: आसान जांच बनाम गिरता मनोबल
अपराधियों का यह नया तरीका पुलिस प्रशासन के लिए एक पेचीदा स्थिति पैदा कर रहा है. पहले पुलिस को गिरोह की पहचान करने में हफ्तों लग जाते थे, लेकिन अब अपराधी खुद अपना नाम उजागर कर देते हैं. इससे पुलिस को शामिल संदिग्धों और उनके नेटवर्क तक पहुंचने में तेजी से सफलता मिल रही है, जिसके परिणामस्वरूप हाल के दिनों में कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं. वहीं दूसरी तरफ सरेआम सोशल मीडिया पर कानून को चुनौती देना आम लोगों के बीच सुरक्षा की भावना को कमजोर करता है. हथियारों का प्रदर्शन युवाओं को अपराध की ओर आकर्षित करने और समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा करने का काम कर रहा है.
