Hazaribagh: जिले में बिजली का संकट अब एक बड़ी परेशानी का रूप ले चुका है, लेकिन दुख की बात यह है कि इस समस्या की गूंज न तो सरकार के गलियारों तक पहुंच रही है और न ही यहां के जनप्रतिनिधियों तक. डीवीसी की कार्यशैली, बिजली विभाग की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता ने मिलकर जिले के लोगों की परेशानी बढ़ा दी है.
आम जनता की बेबसी
शहर के बड़े रसूखदार, नेता और आर्थिक रूप से सक्षम लोग अपने घरों में जनरेटर की व्यवस्था कर किसी तरह राहत पा रहे हैं. उन्हें बिजली कटौती से उतनी परेशानी नहीं होती. लेकिन सबसे ज्यादा मुश्किलें उन लोगों को झेलनी पड़ रही हैं, जिनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं है.

छात्रों की पढ़ाई पर असर
भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली नहीं रहने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए अंधेरे और गर्मी के बीच पढ़ाई करना बेहद मुश्किल हो गया है.
Also Read: बेटी के फैसले से आहत मां ने 6 साल के मासूम बेटे के साथ गया में किया जीवित बेटी का पिंडदान
इन्वर्टर ने भी छोड़ा साथ
लगातार घंटों की बिजली कटौती के कारण इन्वर्टर भी जवाब देने लगे हैं. लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से घरों में लगे इन्वर्टर चार्ज नहीं हो पा रहे हैं और लोगों की परेशानी और बढ़ गई है.
पानी की समस्या ने बढ़ाई मुश्किलें
बिजली संकट का असर जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है. बिजली नहीं रहने के कारण मोटर नहीं चल पा रही है, जिससे कई घरों में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है. लोग पीने के पानी से लेकर दैनिक जरूरतों के लिए परेशान हैं.
जनप्रतिनिधियों पर उठ रहे सवाल
लोग सवाल उठा रहे हैं कि चुनाव के दौरान घर-घर पहुंचने वाले सांसद और विधायक इस गंभीर समस्या पर चुप क्यों हैं. 130 मेगावाट की जरूरत वाले जिले को महज 40 से 50 मेगावाट बिजली मिलना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
व्यापारियों पर भी संकट
छोटे दुकानदारों और व्यापारियों का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है. भीषण गर्मी में बिना बिजली के दुकानों में ग्राहकों की संख्या घट रही है. लोग मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार किया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके.
