रांची: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के दिग्गज नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. शराब घोटाले और आईएएस अधिकारी विनय चौबे को मिली ‘डिफॉल्ट बेल’ के बहाने मरांडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्यप्रणाली और सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की एजेंसियां जांच करने के बजाय “बड़ी मछलियों” को बचाने और सबूतों को मिटाने में जुटी हैं.
सर्कस बन गई है सरकार
सोशल मीडिया के जरिए बाबूलाल मरांडी ने पूछा कि राज्य में सरकार चल रही है या सर्कस. उन्होंने आरोप लगाया कि शराब घोटाले के मुख्य आरोपी आईएएस विनय चौबे के खिलाफ पर्याप्त सबूतों और अन्य अधिकारियों की गवाही के बावजूद, ACB जानबूझकर समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई. इसी ढिलाई के कारण आरोपी को ‘डिफॉल्ट बेल’ मिल गई.
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ACB की भूमिका पर गंभीर सवाल
मरांडी ने ACB को सरकार का हथियार बताते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल अब केवल विरोधियों के दमन और उगाही के लिए हो रहा है. विनय चौबे की गिरफ्तारी सजा दिलाने के लिए नहीं, बल्कि घोटाले के मास्टरमाइंड को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए एक कवच की तरह की गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10-11 महीनों से ACB केवल कार्रवाई का दिखावा कर ED और CBI की आंखों में धूल झोंक रही है. नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि ACB का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को मानसिक यातना देने और शराब घोटाले के सबूतों को नष्ट करने में किया जा रहा है.
इतिहास से सीख लेने की चेतावनी
मरांडी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सत्ता और पावर हमेशा नहीं रहती. उन्होंने कहा कि जो लोग कानून को अपनी जागीर समझते हैं, उनका अंत बुरा होता है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी ACB की कार्यशैली पर संज्ञान लिए जाने की बात दोहराते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल हर चेहरे का पर्दाफाश होकर रहेगा.
